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सभी भाषाएँ समान हैं, उनका प्रतिनिधित्व होना चाहिए: प्रोफेसर हरप्रीत कौर

Education   •   👁 22 views   •   26 Mar 2026
सभी भाषाएँ समान हैं, उनका प्रतिनिधित्व होना चाहिए: प्रोफेसर हरप्रीत कौर
( समारोह में में पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह , अशोक वाजपेयी, प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल एवं श्री प्रियदर्शन भी उपस्थित रहे ।)

‘भाषा में लोकतंत्र’ सेमिनार एवं भाषा उत्सव का भव्य आयोजन
​दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज फॉर वुमन ने 24-25 मार्च 2026 को "भाषा में लोकतंत्र” सेमिनार एवं भाषा उत्सव का भव्य आयोजन किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक ढांचे में भाषा की भूमिका की पड़ताल करना तथा विविध भाषाई परंपराओं की स्थिरता और उनके संरक्षण संबंधी चिंताओं पर विचार-विमर्श करना था।
​कार्यक्रम का शुभारंभ आह्वान एवं दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसका संयोजन कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर हरप्रीत कौर ने किया। स्वागत उद्बोधन में उन्होंने भाषाई समानता पर जोर देते हुए कहा, "सभी भाषाएँ समान हैं, उनका प्रतिनिधित्व होना चाहिए तथा उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए।" उन्होंने भाषा में लिंग तटस्थता की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह उपस्थित रहीं।
​प्रथम सत्र में श्री माधव कौशिक, प्रोफेसर रेनूका सिंह तथा श्री राजशेखर व्यास जैसे ख्यातनाम वक्ताओं ने वैश्वीकरण, उपभोक्तावाद एवं प्रौद्योगिकी के भाषा-साहित्य पर प्रभाव पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने भाषा के दुरुपयोग से सांप्रदायिकता को बढ़ावा मिलने के खतरों और सिनेमा जैसे माध्यमों में भाषा के विकसित स्वरूप पर चिंतन किया। सत्र का समापन प्रोफेसर रवैल सिंह के उद्गारों से हुआ।
​दूसरे सत्र में प्रोफेसर मनोज दीक्षित, प्रोफेसर पंकज कुमार मिश्रा, प्रोफेसर रविंदर सिंह एवं सुश्री रूमी मलिक ने भाषा के औपनिवेशीकरण को समाप्त करने तथा अंग्रेजी के प्रभुत्व के बीच स्वदेशी एवं क्षेत्रीय भाषाओं को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
​आयोजन के दूसरे दिन श्री अशोक वाजपेयी, प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल एवं श्री प्रियदर्शन ने भाषा, लोकतंत्र एवं समाज के अंतर्संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने आधुनिक मीडिया साक्षरता और समाचारों की सही व्याख्या के माध्यम से लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की बात कही। इसके साथ ही प्रोफेसर मनीन्द्र नाथ ठाकुर, प्रोफेसर सुरिंदर एस. जोधका एवं प्रोफेसर पेगी मोहन ने शैक्षणिक व्यवस्था में क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता देने के पहलुओं को दोहराया।
​तत्पश्चात प्रोफेसर सलील मिश्रा, डॉ. स्वराजबीर एवं प्रोफेसर सरबजीत सिंह ने सांस्कृतिक-सामाजिक संदर्भ में क्षेत्रीय भाषाओं के मूल्यांकन एवं समावेशी प्रक्रियाओं पर सार्थक चर्चा की। समापन सत्र में प्रोफेसर निरंजन कुमार एवं डॉ. प्रियरंजन त्रिवेदी के प्रेरक भाषणों ने दो दिवसीय चर्चाओं का सारांश प्रस्तुत किया। प्रोफेसर लोकेश कुमार गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए स्टाफ एवं छात्राओं के योगदान की सराहना की। इस आयोजन ने भाषाई विविधता, समावेशिता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को गढ़ने में भाषा की अहम भूमिका पर एक सकारात्मक संवाद को प्रोत्साहित किया।