The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 डोपिंग से दूर रहें खिलाड़ी: अखिल कुमार, अर्जुन अवार्डी एवं डी.एस.पी. हरियाणा पुलिस     🔴 देवेश चंद्र श्रीवास्तव विशेष आयुक्त पुलिस /क्राइम के मार्गदर्शन एवं सुश्री वेदिता रेड्डी आईएएस निदेशक (शिक्षा) के नेतृत्व में एक लाख बच्चे नशा ना करने के शपथ अभियान में हुए शामिल     🔴 बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों में जागरूकता आवश्यक: प्रो. (डॉ.) जे.एस. यादव डीन     🔴 एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों का दमखम, कामेत हाउस रहा अव्वल     🔴 9 दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? 44°C में तपते नागरिक, जिम्मेदार कौन?     🔴 बस स्थानक के बाहर निजी बसों की भीड़: सड़क किनारे यात्रियों की भराई से यातायात व्यवस्था पर सवाल     🔴 हरियाणा खेल विश्वविद्यालय का मनाएगा तीसरा स्थापना दिवस     🔴 नगरपालिका अध्यक्ष एवं शिक्षा निदेशक के कुशल नेतृत्व में छात्र ~छात्राओं ने रचा इतिहास     🔴 जहाँ सपनों को मिलती है सही दिशा इनायतिया स्कूल बना रहा बच्चों का मजबूत भविष्य     🔴 खिरपुरी जैसी घटना अकोला में न हो: सामाजिक कार्यकर्ता सलीम सिद्दीकी ने जल आपूर्ति व्यवस्था पर उठाए सवाल    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

जनवरी में स्मॉल‑ और मिड‑कैप में भारी गिरावट: बिकवाली के मुख्य कारण और निवेशक इससे कैसे निपट सकते हैं

National   •   👁 26 views   •   24 Jan 2026
 जनवरी में स्मॉल‑ और मिड‑कैप में भारी गिरावट: बिकवाली के मुख्य कारण और निवेशक इससे कैसे निपट सकते हैं
जनवरी में भारतीय शेयर बाजार के स्मॉल‑कैप और मिड‑कैप सेक्टर मेंsharp गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बाजार के व्यापक संकेतों के मुताबिक, निफ्टी और सेंसेक्स की कमजोरी के साथ ही छोटे और मझोले आकार के शेयरों में बेचवाली का दबाव भी बढ़ गया है।
सबसे बड़ा कारण वैश्विक और घरेलू बिकवाली का दबाव है। कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली से बाजार में निरंतर नकारात्मक भावना बनी हुई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने काफी एसेट्स को बेचकर बाहर निकाला जिससे जोखिम परिसंपत्तियों की कीमतों पर दबाव पड़ा।
इसके अलावा स्मॉल‑ और मिड‑कैप शेयरों की ओवरवैल्यूएशन भी एक बड़ा कारण है। पिछले समय में ये सेक्टर बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके थे, जिसकी वजह से उनके मूल्य फंडामेंटल के मुकाबले काफी ऊपर चल रहे थे। जब बाजार में उलटफेर आया, तो निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए इन शेयर्स की बिक्री शुरू कर दी, जिससे गिरावट और तेज़ हुई।
स्मॉल‑और मिड‑कैप सेक्टर में कम लिक्विडिटी भी गिरावट को बढ़ावा देती है। जब निवेशक बड़े पैमाने पर बिकते हैं, तो इन सेक्टरों में मांग अपेक्षाकृत सीमित होती है, जिससे कीमतें जल्दी गिर जाती हैं।
अब सवाल यह है कि निवेशक इससे कैसे निपट सकते हैं? सबसे पहले, शॉर्ट‑टर्म ट्रेडिंग से बचें और बाजार की उथल‑पुथल में भावना के आधार पर निर्णय न लें। लंबे समय के निवेश (लॉन्ग‑टर्म) कर रखना अक्सर बेहतर रहता है, खासकर अगर आप भरोसेमंद कंपनियों में निवेश कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करना जरूरी है — सिर्फ स्मॉल‑ और मिड‑कैप पर निर्भर न रहें और बेहतर फंडामेंटल वाली कंपनियों तथा बड़े शेयरों को भी शामिल करें।
अंत में, बाजार की गिरावट को अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है — यदि आप मूलभूत रूप से मजबूत कंपनियों को छूट पर खरीदने का अवसर पाते हैं, तो दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाकर सोच‑समझकर निवेश करना चाहिए।