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‘मेड इन इंडिया’ C295 विमान रक्षा विनिर्माण के लिए क्या संकेत देते हैं?

Technology  •  👁 35 views  •  24 Jan 2026
‘मेड इन इंडिया’ C295 विमान रक्षा विनिर्माण के लिए क्या संकेत देते हैं?
भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में ‘मेड इन इंडिया’ C‑295 विमान परियोजना एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो रही है। यह परियोजना न सिर्फ भारतीय वायु सेना की क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि देश के एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat) को आगे ले जाने का प्रतीक भी है।
सबसे पहले, यह विमान वडोदरा (गुजरात) में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और एयरबस की साझेदारी के तहत निर्मित किया जाएगा। इसे भारत‑स्पेन रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है, जहां भारत में ही 40 C‑295 विमान बनाए जाएंगे और पहली ‘मेड इन इंडिया’ इकाई सितंबर 2026 तक रोल आउट होने की उम्मीद है।
यह परियोजना यह संकेत देती है कि भारत अब केवल आयातक नहीं बल्कि रक्षा उपकरण में निर्माता भी बन रहा है। अब तक भारतीय सेना को प्रमुख परिवहन विमान स्पेन से आयात किए जाते रहे हैं, लेकिन C‑295 के साथ यह परिदृश्य बदल रहा है। इससे देश को भारी‑भरकम आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योग को मजबूत समर्थन मिलेगा।
C‑295 विमान तकनीकी दृष्टि से एक सक्षम मध्यम सैन्य परिवहन विमान है, जिसका उपयोग सैनिकों और कार्गो को ले जाने, संवेदनशील क्षेत्रों में ऑपरेशन, मानवीय राहत कार्यों और युद्ध‑स्तर पर रणनीतिक तैनाती के लिए किया जा सकता है। इसका निर्माण भारत में होने से तकनीकी कौशल, आपूर्ति श्रृंखला और स्थानीय कम्पोनेंट निर्माण की क्षमता बढ़ेगी।
‘मेड इन इंडिया’ C‑295 परियोजना यह भी संकेत देती है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी रक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। यह पहला मौका है जब एक बड़े सैन्य विमान का उत्पादन निजी उद्योग द्वारा भारत में किया जा रहा है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों को भी सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
इन सबका मतलब है कि भारत अब औद्योगिक और सामरिक दोनों मोर्चों पर विश्वस्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होता जा रहा है। C‑295 का सफल निर्माण और इस्तेमाल न केवल वायु सेना की क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में विश्वस्तरीय गुणवत्ता मानकों के निर्माण और निर्यात संभावनाओं को भी मजबूत करेगा — एक बड़ा कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में।