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केरल हाई कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल को वकीलों से ली गई ज़्यादा एनरोलमेंट फीस वापस करने का निर्देश क्यों दिया?

Crime  •  👁 12 views  •  22 Jan 2026
केरल हाई कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल को वकीलों से ली गई ज़्यादा एनरोलमेंट फीस वापस करने का निर्देश क्यों दिया?
केरल हाई कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल ऑफ केरल को निर्देश दिया है कि उसने कानूनी रूप से निर्धारित नामांकन शुल्क (एनरोलमेंट फीस) से अधिक जो राशि वकीलों से ली है, उसे वापस लौटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह आदेश 19 जनवरी 2026 को दिया।
इस केस में सात वकीलों ने याचिका दाखिल की थी जिसमें उन्होंने कहा कि स्टेट बार काउंसिल ने अधिक फीस वसूली, जो कि ₹750 के कानूनी औचित्य शुल्क से ₹5,000 ज्यादा थी, वह अवैध है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह अतिरिक्त शुल्क अधिवक्ता अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के विपरीत है, जहां स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि कोई भी बार काउंसिल मूल नामांकन शुल्क से अधिक शुल्क नहीं वसूल सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने भी 2024 में कई मौकों पर स्टेट बार काउंसिलों को निर्धारित statutory fee से अधिक फीस नहीं लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और राज्यों के बार काउंसिल सिर्फ वही शुल्क वसूल सकते हैं जो अधिवक्ता अधिनियम में निर्दिष्ट है, और इससे अधिक किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलना अन्यायपूर्ण और विधि-विपरीत है।
केरल हाई कोर्ट ने भी इसी सिद्धांत को अपनाया और कहा कि नामांकन प्रक्रिया के लिए निर्धारित सीमा से अधिक लिया गया पैसा वापस किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि तय सीमा से अधिक शुल्क वसूलना अधिवक्ताओं के मूल अधिकारों का उल्लंघन है क्योंकि इससे कम आय वाले या नव प्रविष्ट वकीलों को पेशे में प्रवेश करने में कठिनाई होती है।
यह आदेश वकीलों को न्यायिक पेशे में समान अवसर देना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि कानून में निर्धारित फीस संरचना का पालन करना बार काउंसिलों के लिए अनिवार्य है, और किसी भी अतिरिक्त शुल्क का वसूली आवश्यकता अनुसार वापस लौटाया जाना चाहिए।
👉 संक्षेप में: केरल हाई कोर्ट का फैसला सीधे तौर पर यह सुनिश्चित करता है कि स्टेट बार काउंसिल निर्धारित फीस से अधिक कोई शुल्क नहीं ले सके, और यदि लिया गया है, तो उसे वापस करना चाहिए ताकि वकीलों के अधिकार सुरक्षित रहें।