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कॉर्पोरेट बनाम किसान: केंद्र ने 9.87 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट लोन किए माफ, कृषि कर्ज माफी सिर्फ 1.67 लाख करोड़ तक सीमित

Economy  •  👁 10 views  •  05 Feb 2026
कॉर्पोरेट बनाम किसान: केंद्र ने 9.87 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट लोन किए माफ, कृषि कर्ज माफी सिर्फ 1.67 लाख करोड़ तक सीमित
केंद्र सरकार की कर्ज माफी नीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक करीब 9.87 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट लोन माफ किए हैं, जबकि कृषि क्षेत्र के लिए यह आंकड़ा सिर्फ 1.67 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रहा है। इस असमानता ने किसानों, विपक्षी दलों और आर्थिक विशेषज्ञों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार का तर्क है कि कॉर्पोरेट लोन माफी दरअसल बैंकों द्वारा किए गए राइट-ऑफ हैं, ताकि बैलेंस शीट साफ की जा सके और बैंक दोबारा कर्ज देने की स्थिति में आ सकें। लेकिन आलोचकों का कहना है कि चाहे इसे तकनीकी रूप से राइट-ऑफ कहा जाए या माफी, इसका फायदा बड़े उद्योगपतियों को मिलता है, जबकि कर्ज में डूबे किसान आज भी आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की भूमिका बेहद अहम है। देश की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है, लेकिन किसानों को मिलने वाली राहत नाकाफी मानी जा रही है। फसल खराब होने, न्यूनतम समर्थन मूल्य, महंगाई और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के बीच सीमित कृषि कर्ज माफी किसानों की परेशानियों को कम नहीं कर पा रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार कॉर्पोरेट सेक्टर को आर्थिक स्थिरता के नाम पर इतनी बड़ी राहत दे सकती है, तो किसानों के लिए भी दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान जरूरी है। इसमें सिर्फ कर्ज माफी नहीं, बल्कि सिंचाई, बीमा, बाजार तक पहुंच और आय की गारंटी जैसे कदम शामिल होने चाहिए।
यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से भी जुड़ा है। सवाल यही है कि क्या विकास का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें बड़े उद्योग सुरक्षित हों, लेकिन अन्नदाता असुरक्षित? आने वाले समय में यह बहस और तेज होने की संभावना है, खासकर जब किसान आंदोलन और ग्रामीण संकट लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।