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गाजियाबाद ट्रिपल ट्रेजेडी के बाद बड़ा सवाल: ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया बैन क्यों ज़रूरी है?

National  •  👁 5 views  •  05 Feb 2026
गाजियाबाद ट्रिपल ट्रेजेडी के बाद बड़ा सवाल: ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया बैन क्यों ज़रूरी है?
गाजियाबाद की ट्रिपल ट्रेजेडी ने एक बार फिर देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सोशल मीडिया नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित कर रहा है? इसी बीच ऑस्ट्रेलिया ने नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लगाने का फैसला कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
ऑस्ट्रेलिया सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों में अवसाद, हिंसक सोच, आत्महत्या के विचार और असामाजिक व्यवहार को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी कारण वहां 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर कानूनी रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। इस फैसले में टेक कंपनियों की जवाबदेही भी तय की गई है, ताकि वे उम्र सत्यापन जैसे उपायों को गंभीरता से लागू करें।
भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच तेजी से बढ़ी है। आज 10–12 साल के बच्चे भी इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। लेकिन डिजिटल साक्षरता और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभी भी बेहद सीमित है। गाजियाबाद जैसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि ऑनलाइन कंटेंट, साइबर बुलिंग और हिंसक ट्रेंड्स बच्चों की सोच पर गहरा असर डाल सकते हैं।
भारत में पहले से ही आईटी एक्ट और बाल संरक्षण से जुड़े कानून मौजूद हैं, लेकिन सोशल मीडिया के लिए कोई स्पष्ट उम्र-आधारित प्रतिबंध नहीं है। ऑस्ट्रेलिया का मॉडल भारत के लिए एक चेतावनी और अवसर दोनों हो सकता है। यदि सरकार समय रहते नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करे, माता-पिता की भूमिका मजबूत करे और स्कूल स्तर पर डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को अनिवार्य बनाए, तो ऐसी त्रासद घटनाओं को रोका जा सकता है।
अब समय आ गया है कि भारत भी यह गंभीरता से सोचे कि तकनीक की आज़ादी और बच्चों की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए—क्योंकि भविष्य सिर्फ डिजिटल नहीं, सुरक्षित भी होना चाहिए।