The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की चेतावनी: राज्यों का फिस्कल पॉपुलिज्म भारत की ग्रोथ और फिस्कल विश्वसनीयता के लिए खतरा

Economy  •  👁 10 views  •  30 Jan 2026
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की चेतावनी: राज्यों का फिस्कल पॉपुलिज्म भारत की ग्रोथ और फिस्कल विश्वसनीयता के लिए खतरा
नई दिल्ली: इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने राज्यों की वित्तीय नीतियों को लेकर एक अहम चेतावनी दी है। सर्वे के मुताबिक, फिस्कल पॉपुलिज्म और बड़े पैमाने पर कैश ट्रांसफर योजनाएं राज्यों के बजट पर दबाव बढ़ा रही हैं, जिससे विकास को बढ़ावा देने वाले पूंजीगत खर्च (Capex) में कटौती का खतरा पैदा हो रहा है। इसका सीधा असर भारत की फिस्कल क्रेडिबिलिटी यानी वित्तीय विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।
सर्वे में कहा गया है कि मुफ्त योजनाएं, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और अल्पकालिक राजनीतिक लाभ वाली घोषणाएं राज्यों के राजस्व संसाधनों को सीमित कर रही हैं। नतीजतन, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और उत्पादक क्षेत्रों में निवेश घटने की आशंका है, जो दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए बेहद जरूरी हैं।
आर्थिक सर्वे यह भी रेखांकित करता है कि कैश ट्रांसफर अपने आप में गलत नहीं हैं, लेकिन अगर वे राजस्व की स्थिरता और उत्पादक निवेश की कीमत पर किए जाते हैं, तो वे अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे से न केवल राज्यों की उधारी बढ़ेगी, बल्कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है।
सर्वे में चेताया गया है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो केंद्र और राज्यों द्वारा मिलकर बनाए गए फिस्कल कंसॉलिडेशन रोडमैप को नुकसान पहुंचेगा। इससे भारत की छवि एक अनुशासित और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में कमजोर हो सकती है, खासकर वैश्विक निवेशकों के बीच।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि राज्यों को वेलफेयर और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाना होगा। लक्षित सब्सिडी, बेहतर टैक्स कलेक्शन और पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता देकर ही टिकाऊ विकास संभव है।
संक्षेप में, इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 राज्यों को आगाह करता है कि फिस्कल पॉपुलिज्म की कीमत दीर्घकालिक विकास और फिस्कल विश्वसनीयता से चुकानी पड़ सकती है।