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स्मिथसोनियन तीन प्राचीन भारतीय कांस्य मूर्तियों को लौटाएगा, अवैध निष्कासन के सबूत मिले

National  •  👁 5 views  •  30 Jan 2026
स्मिथसोनियन तीन प्राचीन भारतीय कांस्य मूर्तियों को लौटाएगा, अवैध निष्कासन के सबूत मिले
वाशिंगटन: अमेरिका के प्रतिष्ठित स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने तीन प्राचीन भारतीय कांस्य मूर्तियों को भारत सरकार को वापस लौटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह कदम गहन प्रोवनेंस शोध (provenance research) के बाद उठाया गया, जिसमें पुष्टि हुई कि ये मूर्तियाँ तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गई थीं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाए गई थीं।
अनुसंधान से पता चला है कि इन मूर्तियों को 1956 से 1959 के बीच दक्षिण भारत के मंदिरों में देखा गया था और बाद में गलत दस्तावेजों के साथ अमेरिका पहुँचाई गईं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने शोध की समीक्षा कर मूर्तियों के अवैध निष्कासन की पुष्टि की है।
लौटाई जाने वाली कलाकृतियों में शामिल हैं:
शिव नटराज (Shiva Nataraja) – चोल काल, लगभग 990 ईस्वी
सोमास्कंद (Somaskanda) – चोल काल, 12वीं शताब्दी
सेंट सुंदरर और परवई (Saint Sundarar with Paravai) – विजयनगर काल, 16वीं शताब्दी
ये मूर्तियाँ दक्षिण भारतीय कांस्य कला की उत्कृष्टता का प्रतीक हैं और वे पहले मंदिरों में पूजा एवं जुलूसों में उपयोग की जाती थीं। स्मिथसोनियन ने बताया है कि भारत और अमेरिका सरकारों के बीच समझौते के तहत इन कलाकृतियों में से एक, शिव नटराज, को लंबे समय के लोन (long‑term loan) पर म्यूजियम में प्रदर्शित रखा जाएगा, ताकि दर्शकों को इसके इतिहास, रवानगी और वापसी की पूरी कहानी समझाई जा सके।
म्यूजियम के निदेशक ने कहा कि यह निर्णय उनके नैतिक संग्रहालय अभ्यास और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शोध टीम और पांडिचेरी के फ़ोटो अभिलेखागार की मदद से मूर्तियों की उत्पत्ति और अवैध निष्कासन के सबूत इकट्ठे किए गए।
यह कदम वैश्विक सांस्कृतिक विरासत की वापसी के आंदोलन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिलता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संग्रहालयों में ऐतिहासिक वस्तुओं के नैतिक प्रबंधन की दिशा में भी सकारात्मक संदेश जाता है।