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दलित लड़के को गौशाला में बंद करने के मामले में आरोपी महिला को हिमाचल हाई कोर्ट से जमानत, आत्महत्या के लिए उकसाने का है आरोप

National  •  👁 10 views  •  30 Jan 2026
दलित लड़के को गौशाला में बंद करने के मामले में आरोपी महिला को हिमाचल हाई कोर्ट से जमानत, आत्महत्या के लिए उकसाने का है आरोप
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दलित नाबालिग लड़के को गौशाला में बंद करने और उसकी मौत के लिए उकसाने की आरोपी महिला को जमानत दे दी है। यह मामला राज्य में सामाजिक भेदभाव और जातिगत उत्पीड़न से जुड़े गंभीर आरोपों के कारण पहले ही चर्चा में रहा है।
मामले के अनुसार, आरोप है कि एक दलित समुदाय के लड़के को कथित तौर पर गौशाला में बंद किया गया, जिसके बाद उसने आत्महत्या कर ली। पीड़ित परिवार ने महिला पर मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। इस संबंध में पुलिस ने महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी महिला जांच में सहयोग कर रही है और फिलहाल उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि ट्रायल के दौरान होगी। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है, खासकर जब चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हो।
हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जमानत देना आरोपों की गंभीरता को कम नहीं करता, और मामले की सुनवाई कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी। अदालत ने आरोपी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी, जिनमें गवाहों को प्रभावित न करने और जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश शामिल हैं।
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों की ओर से नाराज़गी जताई गई है। कई दलित संगठनों ने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कड़ी निगरानी की मांग की है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत और दोषसिद्धि दो अलग प्रक्रियाएं हैं और अंतिम फैसला साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
यह मामला एक बार फिर देश में जातिगत भेदभाव और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।