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DoPT रिपोर्ट: SC/ST/OBC सैनिटेशन वर्कर्स में 66% और Group‑A में केवल 40% — प्रतिनिधित्व में गंभीर असंतुलन

National  •  👁 13 views  •  29 Jan 2026
DoPT रिपोर्ट: SC/ST/OBC सैनिटेशन वर्कर्स में 66% और Group‑A में केवल 40% — प्रतिनिधित्व में गंभीर असंतुलन
सरकार के Department of Personnel and Training (DoPT) की वार्षिक रिपोर्ट 2024‑25 ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों में जातिगत प्रतिनिधित्व को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े प्रकाशित किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कर्मचारियों का वितरण नौकरी के स्तर के हिसाब से बहुत असमान है।
सबसे बड़ी विसंगति सैनिटेशन वर्कर्स (सफाई कर्मी) में देखी गई है, जहाँ SC/ST/OBC के लोग 66% से अधिक हैं। यानी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के लगभग दो‑तिहाई सफाई कर्मी इन्हीं समुदायों से आते हैं। ये आंकड़ा सिर्फ नौकरी की संख्या नहीं बल्कि सामाजिक संरचना और ऐतिहासिक प्रभावों को भी उजागर करता है।
वहीं दूसरी ओर ग्रुप‑A (सुपीरियर सिविल सर्विसेज स्तर) में SC/ST/OBC कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व लगभग 40% है, जो कुल मिलाकर सरकारी सेवाओं में SC/ST/OBC की हिस्सेदारी (करीब 52%) से भी कम दिखता है। यह असंतुलन सुझाव देता है कि उच्च पदों पर पहुंचने में संरचनात्मक चुनौतियाँ और प्रतिबंध आज भी मौजूद हैं, जबकि नीचे के श्रेणीबद्ध कार्यों में इन समुदायों की भागीदारी बहुत अधिक है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि SC, ST और OBC के लिए आरक्षण के तहत निर्धारित 15%, 7.5% और 27% कोटा के बावजूद, वास्तविक प्रतिनिधित्व अलग‑अलग स्तरों पर काफी भिन्न है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा सिर्फ सरकारी नियोजन की कमी नहीं, बल्कि सामाजिक गतिशीलता, शिक्षा और अवसरों तक पहुँच में अंतर को भी दिखाता है। निचले स्तर के कार्यों में SC/ST/OBC का भारी प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से जाने‑माने है, लेकिन उन्नत स्तर की नौकरी में उनका कम हिस्सा, राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
इस रिपोर्ट ने सरकारी नीतियों में समावेशन और बराबरी के लिए फिर से बहस की शुरुआत कर दी है, ताकि उच्च पदों पर भी समाज के विविध वर्गों का न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
यह रिपोर्ट भारत के सरकारी रोजगार और सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करती है।