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इकोनॉमिक सर्वे 2025-26: AI से नौकरियों पर खतरे की आशंका बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई, मजबूत संस्थानों पर दिया गया ज़ोर

Economy  •  👁 9 views  •  29 Jan 2026
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26: AI से नौकरियों पर खतरे की आशंका बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई, मजबूत संस्थानों पर दिया गया ज़ोर
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर फैल रही चिंताओं पर अहम टिप्पणी की गई है। सर्वे के अनुसार, AI के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने का डर बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी बदलाव ऐतिहासिक रूप से रोजगार की प्रकृति को बदलते रहे हैं, न कि उन्हें पूरी तरह समाप्त किया है। ऐसे में AI को खतरे के बजाय एक अवसर के रूप में देखने की जरूरत है।
सर्वे में इस बात पर जोर दिया गया है कि AI से कुछ पारंपरिक नौकरियों पर असर जरूर पड़ सकता है, लेकिन इसके साथ ही नई भूमिकाएं, नए कौशल और नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। खास तौर पर डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, AI मॉडल ट्रेनिंग, हेल्थटेक और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, असली चुनौती नौकरियों का खत्म होना नहीं, बल्कि कौशल अंतर (स्किल गैप) को समय रहते पाटना है।
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में मजबूत संस्थानों को “समय की ज़रूरत” बताया गया है। इसमें शिक्षा प्रणाली, श्रम बाजार, नियामक ढांचे और सामाजिक सुरक्षा संस्थानों को मजबूत करने की सिफारिश की गई है, ताकि तकनीकी बदलाव के दौर में श्रमिकों को सुरक्षित और सक्षम बनाया जा सके। सर्वे का मानना है कि यदि संस्थान लचीले और समावेशी होंगे, तो AI से होने वाले लाभ समाज के बड़े हिस्से तक पहुंच सकते हैं।
रिपोर्ट में सरकार, निजी क्षेत्र और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग पर भी बल दिया गया है। री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है। कुल मिलाकर, इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 का संदेश साफ है—AI से डरने की नहीं, बल्कि उसे समझकर, सही नीतियों और मजबूत संस्थानों के जरिए अपनाने की जरूरत है।