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अफीम युद्धों से 1962 के तेजपुर तक: शेहनाब साहिन की रचना में असम के भूले-बिसरे इतिहास की काल्पनिक यात्रा

National  •  👁 12 views  •  28 Jan 2026
अफीम युद्धों से 1962 के तेजपुर तक: शेहनाब साहिन की रचना में असम के भूले-बिसरे इतिहास की काल्पनिक यात्रा
नई दिल्ली: लेखिका शेहनाब साहिन ने अपनी नई काल्पनिक कृति के माध्यम से असम के उस इतिहास को साहित्यिक रूप में जीवंत किया है, जो अक्सर मुख्यधारा की ऐतिहासिक चर्चाओं से बाहर रह गया। अफीम युद्धों के दौर से लेकर 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तेजपुर पर हुए आक्रमण तक, साहिन की कहानी असम की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्मृतियों को जोड़ती है।
यह रचना इतिहास और कल्पना के बीच संतुलन बनाते हुए पाठकों को उस समय में ले जाती है, जब असम औपनिवेशिक हस्तक्षेप, व्यापारिक शोषण और युद्ध की अनिश्चितताओं से गुजर रहा था। अफीम युद्धों के संदर्भ में साहिन यह दिखाती हैं कि कैसे वैश्विक घटनाओं का असर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों तक पहुँचा और स्थानीय समाज को गहराई से प्रभावित किया।
1962 के युद्ध के दौरान तेजपुर से प्रशासन के पलायन और आम लोगों में फैले डर को लेखिका ने मानवीय संवेदनाओं के साथ चित्रित किया है। कहानी में केवल सैन्य घटनाएँ नहीं, बल्कि आम नागरिकों की स्मृतियाँ, टूटते घर और बदलती पहचान भी केंद्र में हैं।
साहित्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कृति असम के इतिहास को समझने का एक वैकल्पिक और भावनात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है। काल्पनिक पात्रों के ज़रिए वास्तविक घटनाओं को पिरोना पाठकों को इतिहास से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनता है।
शेहनाब साहिन की यह रचना यह सवाल भी उठाती है कि किसका इतिहास लिखा जाता है और किसे भुला दिया जाता है। असम के भूले हुए अतीत को सामने लाकर यह किताब न केवल साहित्यिक महत्व रखती है, बल्कि इतिहास और स्मृति पर एक गंभीर विमर्श भी प्रस्तुत करती है।