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समुद्री प्रदूषण के वैश्विक संघर्ष में भारत की भूमिका

National  •  👁 13 views  •  28 Jan 2026
समुद्री प्रदूषण के वैश्विक संघर्ष में भारत की भूमिका
वैश्विक स्तर पर समुद्री प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है। प्लास्टिक कचरा, तेल फैलाव, औद्योगिक अपशिष्ट और जहरीले रसायन समुद्री जीवन और तटीय पारिस्थितिकी को खतरे में डाल रहे हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिए दुनिया भर के देशों के साथ भारत भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।
भारत ने समुद्री प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, भारत ने समुद्री क्षेत्र में अपशिष्ट प्रबंधन, तटीय क्षेत्रों की सफाई, और प्लास्टिक प्रतिबंध नीति जैसी पहल शुरू की हैं। इसके अलावा, भारत ने तेल फैलाव और जहरीले अपशिष्ट से समुद्री जीवन की रक्षा के लिए ऑपरेशन क्लीन सागर और राष्ट्रीय समुद्री प्रदूषण निगरानी कार्यक्रम जैसे प्रोजेक्ट भी लागू किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने UN समुद्री प्रदूषण नियंत्रण समझौते, ग्लोबल ओशन ऑब्जर्वेशन सिस्टम, और विश्व समुद्री दिवस पर जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी दिखाई है। भारत की पहल यह सुनिश्चित करती हैं कि समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग हो और भविष्य की पीढ़ियों के लिए समुद्री पारिस्थितिकी सुरक्षित रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री प्रदूषण केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी है। मछुआरों, तटीय समुदायों और पर्यटन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। इस दृष्टि से भारत की भूमिका महत्वपूर्ण बन जाती है क्योंकि वह समुद्री प्रदूषण पर वैज्ञानिक अनुसंधान, डेटा साझा करना और जागरूकता अभियान चला रहा है।
भारत की सक्रिय भागीदारी न केवल समुद्री जीवन की रक्षा करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्थायी समुद्री विकास और पर्यावरण संरक्षण में देश की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करती है। ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करते हैं और समुद्रों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने में योगदान देते हैं।