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गैर-नागरिक भी दायर कर सकते हैं रिट: मद्रास हाई कोर्ट ने SBI द्वारा श्रीलंकाई शरणार्थी की नौकरी खत्म करने का फैसला रद्द किया

law   •   👁 18 views   •   28 Jan 2026
गैर-नागरिक भी दायर कर सकते हैं रिट: मद्रास हाई कोर्ट ने SBI द्वारा श्रीलंकाई शरणार्थी की नौकरी खत्म करने का फैसला रद्द किया
चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा एक श्रीलंकाई शरणार्थी की नौकरी खत्म करने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने इस निर्णय में स्पष्ट किया कि भारत में वैध रूप से रहने वाले गैर-नागरिक भी राज्य या सरकारी एजेंसियों के खिलाफ रिट याचिका दायर कर सकते हैं, यदि उनके रोजगार या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो।
इस मामले में, श्रीलंकाई शरणार्थी ने अदालत में दलील दी थी कि उसे बिना उचित कारण और प्रक्रिया अपनाए नौकरी से निकाल दिया गया। बैंक ने दावा किया कि चूंकि वह विदेशी नागरिक हैं, इसलिए उनका रोजगार समाप्त करना वैध है। हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि SBI का यह कदम न्यायसंगत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान और बाल, महिला एवं शरणार्थी अधिकारों से संबंधित कानून न केवल नागरिकों के लिए हैं, बल्कि उन व्यक्तियों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करते हैं जो भारत में वैध रूप से रह रहे हैं। अदालत ने कहा कि रोजगार से संबंधित फैसलों में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला विदेशी नागरिकों और शरणार्थियों के रोजगार और कानूनी सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह आदेश यह भी दर्शाता है कि भारत में संवैधानिक अधिकार केवल नागरिकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश में रह रहे सभी वैध निवासियों को न्यायिक संरक्षण का हक़ है।
हाई कोर्ट का यह निर्णय न केवल शरणार्थियों के अधिकारों को सुनिश्चित करता है, बल्कि सरकारी और निजी संस्थानों को भी कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि गैर-नागरिक भी भारतीय न्याय प्रणाली के तहत न्याय की मांग कर सकते हैं, और उनके अधिकारों का उल्लंघन कानूनी कार्रवाई योग्य है।