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‘आधुनिक दौर की राजकुमारी’ पद्मजा कुमारी परमार: टाइप-1 डायबिटीज़ के साथ ज़िंदगी, “पाँच साल की उम्र में बीमारी ने सब कुछ बदल दिया”

Entertainment  •  👁 11 views  •  28 Jan 2026
‘आधुनिक दौर की राजकुमारी’ पद्मजा कुमारी परमार: टाइप-1 डायबिटीज़ के साथ ज़िंदगी, “पाँच साल की उम्र में बीमारी ने सब कुछ बदल दिया”
पद्मजा कुमारी परमार को अक्सर “मॉडर्न-डे प्रिंसेस” कहा जाता है, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ शाही विरासत तक सीमित नहीं है। उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई है—टाइप-1 डायबिटीज़, जिसके साथ वह बचपन से जी रही हैं। महज़ पाँच साल की उम्र में इस बीमारी का पता चलना उनके लिए एक ऐसा मोड़ था, जिसने जीवन को रातों-रात बदल दिया।
पद्मजा कहती हैं कि उन्हें ऐसी दुनिया याद ही नहीं, जहाँ डायबिटीज़ न हो। रोज़ाना इंसुलिन लेना, ब्लड शुगर की नियमित जाँच और खान-पान को लेकर सख़्त अनुशासन—यह सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। जिस उम्र में बच्चे बेफिक्र होकर खेलते-कूदते हैं, उस उम्र में उन्हें ज़िम्मेदारी और आत्मनियंत्रण सीखना पड़ा।
टाइप-1 डायबिटीज़ एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसे अक्सर भारत में लेकर भ्रम रहता है। इसे कई बार जीवनशैली से जुड़ी बीमारी समझ लिया जाता है, जबकि इसका खान-पान या शारीरिक गतिविधि से सीधा संबंध नहीं होता। पद्मजा कुमारी इस गलतफहमी को तोड़ने के लिए खुलकर अपनी कहानी साझा करती हैं।
उनका मानना है कि बीमारी ने उनसे बहुत कुछ छीना ज़रूर, लेकिन बदले में उन्हें मानसिक मज़बूती, आत्मअनुशासन और संवेदनशीलता भी दी। परिवार का सहयोग और सही मेडिकल देखभाल उनके सफर का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने कभी इस स्थिति को कमजोरी नहीं बनने दिया।
आज पद्मजा अपनी सार्वजनिक पहचान का इस्तेमाल जागरूकता फैलाने के लिए करती हैं, ताकि टाइप-1 डायबिटीज़ से जूझ रहे बच्चे और उनके परिवार खुद को अकेला न महसूस करें। वह यह संदेश देना चाहती हैं कि सही जानकारी, समय पर इलाज और सकारात्मक सोच के साथ इस बीमारी के बावजूद एक सक्रिय, सफल और संतुलित जीवन जिया जा सकता है।
पद्मजा कुमारी परमार की कहानी यह साबित करती है कि असली शाहीपन हालात से नहीं, बल्कि उनसे लड़ने के साहस से पहचाना जाता है।