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‘पूरी तरह से अनुचित’: रेप पीड़िता के चरित्र पर टिप्पणी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वकील को कड़ी फटकार

law   •   👁 36 views   •   05 Feb 2026
‘पूरी तरह से अनुचित’: रेप पीड़िता के चरित्र पर टिप्पणी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वकील को कड़ी फटकार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक रेप मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाने वाले वकील की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने इसे “पूरी तरह से अनुचित” करार देते हुए स्पष्ट कहा कि यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता के निजी जीवन या चरित्र पर हमला करना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि कानून की भावना के भी खिलाफ है।
यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब आरोपी पक्ष के वकील ने कोर्ट में बहस के दौरान पीड़िता के आचरण और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े सवाल उठाने की कोशिश की। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह की दलीलें पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात पहुंचाती हैं और न्यायिक प्रक्रिया को दूषित करती हैं।
अदालत ने साफ किया कि भारतीय कानून, विशेषकर आपराधिक प्रक्रिया और साक्ष्य अधिनियम, यौन अपराधों में पीड़िता की गरिमा और निजता की रक्षा पर जोर देता है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई फैसलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि रेप मामलों में पीड़िता का चरित्र या उसका अतीत किसी भी तरह से प्रासंगिक नहीं होता।
हाई कोर्ट ने वकीलों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे बहस के दौरान मर्यादा और संवेदनशीलता बनाए रखें। कोर्ट के अनुसार, कानून का उद्देश्य सच्चाई तक पहुंचना है, न कि पीड़िता को कठघरे में खड़ा करना। यदि इस तरह की टिप्पणियों को बढ़ावा दिया गया, तो यह न्याय व्यवस्था में महिलाओं के भरोसे को कमजोर करेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश है कि अदालतें अब जेंडर सेंसिटिविटी को लेकर पहले से ज्यादा सख्त रुख अपना रही हैं। यह फैसला उन पीड़िताओं के लिए भी अहम है, जो सामाजिक दबाव और डर के कारण न्याय की लड़ाई लड़ने से पीछे हट जाती हैं।
कुल मिलाकर, इलाहाबाद हाई कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी न्यायपालिका के उस रुख को दर्शाती है, जिसमें पीड़िता की गरिमा और सम्मान को सर्वोपरि माना गया है—और किसी भी स्तर पर चरित्र हनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।