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भारत-EU FTA: फार्मा, मेडिकल डिवाइस और मरीज़ों पर इसका असर क्या होगा? एक्सपर्ट्स ने समझाया

National  •  👁 6 views  •  27 Jan 2026
भारत-EU FTA: फार्मा, मेडिकल डिवाइस और मरीज़ों पर इसका असर क्या होगा? एक्सपर्ट्स ने समझाया
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लंबे समय से चर्चा में था और अब इसे लेकर विशेषज्ञों ने इसे स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल सेक्टर पर संभावित प्रभाव के लिहाज से समझाया है। यह समझौता दोनों पक्षों के व्यापारिक और निवेश संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ मरीज़ों और उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस FTA से फार्मा और मेडिकल डिवाइस उद्योग को खासा लाभ होगा। यूरोपियन बाजार में भारतीय दवाइयों और उपकरणों का निर्यात बढ़ सकता है, क्योंकि टैरिफ में कमी और प्रक्रियाओं में सरलता आएगी। इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उद्योग को नई बाजार संभावनाएं मिलेंगी।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मरीज़ों के दृष्टिकोण से सावधानी जरूरी है। यदि विदेशी कंपनियों के उत्पाद भारत में बड़ी संख्या में आएं, तो महंगे यूरोपीय मेडिकल डिवाइस और दवाइयाँ बाजार में सस्ते विकल्पों पर असर डाल सकती हैं। इसलिए सरकार को मूल्य नियंत्रण, रेगुलेटरी नीतियों और गुणवत्ता मानकों पर ध्यान देना होगा।
FTA के सकारात्मक पहलुओं में नई तकनीक, निवेश और हेल्थकेयर सुविधाओं का विस्तार शामिल है। यूरोपीय मेडिकल डिवाइस कंपनियां भारत में निवेश कर सकती हैं, जिससे डायग्नोस्टिक सुविधाएं, रिमोट हेल्थकेयर और आधुनिक उपकरण आम लोगों तक पहुंच सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता दोनों पक्षों के लिए जीत-जीत की स्थिति बन सकता है, बशर्ते इसे सावधानीपूर्वक लागू किया जाए।
कुल मिलाकर, भारत-EU FTA केवल व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि फार्मा, मेडिकल डिवाइस और मरीज़ों की भलाई से जुड़ा अहम कदम है। सही क्रियान्वयन से यह भारत के स्वास्थ्य और हेल्थकेयर सेक्टर को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।