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पृथ्वी के पानी का रहस्य सुलझाने के लिए NASA का चाँद की ओर रुख

National  •  👁 10 views  •  27 Jan 2026
पृथ्वी के पानी का रहस्य सुलझाने के लिए NASA का चाँद की ओर रुख
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने पृथ्वी पर मौजूद पानी की उत्पत्ति (origin of Earth’s water) को समझने के लिए चाँद के प्राचीन रिकॉर्ड की मदद लेने का निर्णय किया है। यह कदम वैज्ञानिकों के बीच दशकों से चल रहे सवाल — धरती पर पानी कैसे आया? — का जवाब ढूँढने के प्रयास का हिस्सा है।
वैज्ञानिकों ने NASA के Apollo मिशन के दौरान चाँद से लाए गए मिट्टी (लूनर रेगोलिथ) के नमूनों का विश्लेषण किया। चाँद का सतह रिकॉर्ड पृथ्वी की तरह मौसम और प्लेट टेक्टोनिक्स से प्रभावित नहीं होता, इसलिए यह सौरमंडल के शुरुआती इतिहास और उल्कापिंडों (meteorites) के प्रभाव का जीवित साक्ष्य रखता है। उस रिकॉर्ड ने दिखाया कि पृथ्वी को मिलने वाला पानी केवल बड़े उल्कापिंडों के बाद की “लेट डिलीवरी” (late delivery) से नहीं आया हो सकता — यह विचार अब वैज्ञानिकों द्वारा चुनौती दी जा रही है।
नए अध्ययन के अनुसार, ऑक्सीजन आइसोटोप (“triple oxygen isotopes”) जैसे उन्नत तकनीकों से पता चला कि चाँद की मिट्टी में केवल एक छोटा हिस्सा ही कार्बन‑समृद्ध उल्कापिंड के पदार्थ का है। इसका मतलब यह हुआ कि उल्कापिंडों ने पृथ्वी तक पानी पहुँचाया हो सकते हैं, लेकिन वे महासागरों में मौजूद पानी के मुख्य स्रोत नहीं हैं। इससे यह विचार मजबूत होता है कि पृथ्वी के अधिकांश पानी पृथ्वी के बनने के शुरुआती समय में ही वहाँ मौजूद सामग्री के साथ आया था — या फिर अन्य प्रकार के खगोलीय पिंडों से बहुत पहले आया था।
चाँद पर मौजूद जानकारी को समझकर शोधकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सौरमंडल की शुरुआत में पानी कहाँ से आया और कैसे यह पृथ्वी जैसे ग्रहों पर इतना प्रचुर मात्रा में मौजूद हो गया। चूँकि पृथ्वी खुद का इतिहास मौसम और प्लेटों के प्रभाव से मिटा देती है, चाँद जैसे स्थिर और अप्रभावित रिकॉर्ड वाले पिंड का अध्ययन करना वैज्ञानिकों के लिए इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक अनमोल स्रोत है।
आने वाले समय में NASA की अंतरिक्ष योजनाओं, जैसे Artemis मिशन के तहत चाँद के और नमूनों को वापस लाने की उम्मीद है, जो इस खोज को और आगे बढ़ा सकते हैं। इस शोध से स्पष्ट होता है कि पृथ्वी पर पानी सिर्फ बाद के उल्कापिंडों से नहीं आया — बल्कि उसका इतिहास कहीं भी अंतिम चार अरब सालों तक फैला हुआ है, और चाँद हमें इसका सबसे अच्छा पुराना रिकॉर्ड देता है।