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‘आयरलैंड साम्राज्य के लिए एक प्रयोगशाला था’: इतिहासकार जेन ओल्मेयर ने भारत, आयरलैंड और ब्रिटिश शासन पर रखे विचार

National  •  👁 5 views  •  27 Jan 2026
‘आयरलैंड साम्राज्य के लिए एक प्रयोगशाला था’: इतिहासकार जेन ओल्मेयर ने भारत, आयरलैंड और ब्रिटिश शासन पर रखे विचार
प्रसिद्ध इतिहासकार जेन ओल्मेयर ने भारत, आयरलैंड और ब्रिटिश साम्राज्य के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर बात करते हुए कहा कि “आयरलैंड ब्रिटिश साम्राज्य के लिए एक प्रयोगशाला था”। उनके अनुसार, ब्रिटिश शासन ने आयरलैंड में जिन प्रशासनिक, राजनीतिक और दमनकारी नीतियों को आज़माया, उन्हें बाद में भारत जैसे उपनिवेशों में लागू किया गया।
ओल्मेयर का कहना है कि आयरलैंड और भारत, दोनों ही देशों ने औपनिवेशिक शासन के तहत समान अनुभव साझा किए। भूमि व्यवस्था, कर प्रणाली, धार्मिक विभाजन और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे प्रयोग पहले आयरलैंड में किए गए और फिर भारत में उन्हें बड़े पैमाने पर दोहराया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि ब्रिटिश शासन ने उपनिवेशों को नीतिगत प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल किया।
उन्होंने यह भी बताया कि आयरलैंड में अपनाई गई ‘डिवाइड एंड रूल’ नीति भारत में और अधिक संगठित रूप में लागू हुई। धार्मिक और सामाजिक विभाजनों को बढ़ावा देकर सत्ता को बनाए रखना ब्रिटिश रणनीति का अहम हिस्सा था। ओल्मेयर के अनुसार, इन नीतियों का असर आज भी भारत और आयरलैंड की राजनीति और सामाजिक संरचना में देखा जा सकता है।
जेन ओल्मेयर ने यह भी रेखांकित किया कि औपनिवेशिक इतिहास को केवल अतीत की कहानी मानना गलत होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन की नीतियों के दीर्घकालिक प्रभाव आज भी लोकतंत्र, शासन व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं में दिखाई देते हैं।
उनका मानना है कि भारत और आयरलैंड के अनुभवों की तुलना से यह समझने में मदद मिलती है कि साम्राज्य कैसे काम करता था और उसने अपने उपनिवेशों को कैसे आकार दिया। यह अध्ययन न केवल इतिहास के लिए, बल्कि आज की राजनीति और वैश्विक सत्ता संरचनाओं को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इस तरह, जेन ओल्मेयर के विचार भारत, आयरलैंड और ब्रिटिश शासन के बीच गहरे और जटिल ऐतिहासिक संबंधों को उजागर करते हैं और औपनिवेशिक इतिहास पर नई बहस को जन्म देते हैं।