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गणतंत्र दिवस परेड में बैक्ट्रियन ऊंट से शिकारी पक्षी तक: भारतीय सेना के पशु विंग का गौरवशाली इतिहास और महत्व

National  •  👁 9 views  •  26 Jan 2026
गणतंत्र दिवस परेड में बैक्ट्रियन ऊंट से शिकारी पक्षी तक: भारतीय सेना के पशु विंग का गौरवशाली इतिहास और महत्व
गणतंत्र दिवस परेड में जब बैक्ट्रियन ऊंट, जांस्कर टट्टू और प्रशिक्षित शिकारी पक्षी नज़र आते हैं, तो यह केवल एक दृश्य आकर्षण नहीं होता, बल्कि भारतीय सेना के पशु विंग की ऐतिहासिक और रणनीतिक भूमिका की याद दिलाता है। यह विंग दशकों से सेना की परिचालन क्षमताओं और परंपराओं का अहम हिस्सा रहा है।
भारतीय सेना का पशु विंग सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैक्ट्रियन ऊंट, जो दो कूबड़ वाले होते हैं, विशेष रूप से लद्दाख और ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं। वे अत्यधिक ठंड, ऊंचाई और कम ऑक्सीजन में भी भार ढोने में सक्षम होते हैं।
वहीं जांस्कर टट्टू हिमालयी क्षेत्रों में सेना की जीवनरेखा माने जाते हैं। संकरे और खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर ये टट्टू हथियार, राशन और जरूरी सामान पहुंचाने में मदद करते हैं, जहां आधुनिक वाहन भी नहीं पहुंच पाते।
सेना के पशु विंग में शिकारी पक्षियों की भी खास भूमिका है। प्रशिक्षित बाज और अन्य पक्षी हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों के आसपास बर्ड हज़र्ड कंट्रोल में इस्तेमाल होते हैं, जिससे विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। यह पारंपरिक लेकिन प्रभावी तकनीक आज भी प्रासंगिक है।
ऐतिहासिक रूप से, पशु विंग ने युद्धों, आपदा राहत और शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आधुनिक तकनीक के बावजूद, ये जानवर आज भी पर्यावरण के अनुकूल, भरोसेमंद और रणनीतिक संसाधन बने हुए हैं।
गणतंत्र दिवस परेड में उनकी मौजूदगी सेना की उस विरासत को दर्शाती है, जहां प्रकृति और मानव कौशल का संतुलन राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा रहा है।