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गणतंत्र दिवस परेड में DRDO की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का डेब्यू: जानिए खासियतें और रणनीतिक महत्व

National  •  👁 7 views  •  26 Jan 2026
गणतंत्र दिवस परेड में DRDO की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का डेब्यू: जानिए खासियतें और रणनीतिक महत्व
गणतंत्र दिवस परेड के दौरान DRDO की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया, जिसने देश की उन्नत रक्षा क्षमताओं की झलक दुनिया को दिखाई। इस डेब्यू को भारत की रणनीतिक ताकत के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक गति है। यह मिसाइल मैक 5 (ध्वनि की गति से पांच गुना) से भी अधिक रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ सकती है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, यह लॉन्च के बाद ऊपरी वायुमंडल में ग्लाइड करते हुए दिशा बदलने में सक्षम होती है, जिससे इसे ट्रैक करना और रोकना बेहद कठिन हो जाता है।
DRDO वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक भारत को नई पीढ़ी की स्ट्राइक क्षमता प्रदान करती है। इसकी उच्च सटीकता इसे रणनीतिक और सामरिक दोनों तरह के लक्ष्यों के लिए प्रभावी बनाती है। साथ ही, यह मिसाइल मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम मानी जाती है, जो इसे और भी घातक बनाती है।
रणनीतिक दृष्टि से, हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल भारत की न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता (Minimum Deterrence) को मजबूत करती है। यह तकनीक क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करती है और संभावित विरोधियों को स्पष्ट संदेश देती है कि देश अत्याधुनिक रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बन रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गणतंत्र दिवस परेड में इसका प्रदर्शन केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत संकेत है। यह भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमता और भविष्य की युद्ध रणनीतियों में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।