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बजट 2026 भारत के सेफ हार्बर नियमों को कैसे सुधार सकता है, जो अब तक प्रभावी नहीं रहे

Economy  •  👁 9 views  •  26 Jan 2026
बजट 2026 भारत के सेफ हार्बर नियमों को कैसे सुधार सकता है, जो अब तक प्रभावी नहीं रहे
नई दिल्ली: भारत के सेफ हार्बर नियम, जिन्हें ट्रांसफर प्राइसिंग विवाद कम करने और टैक्स निश्चितता बढ़ाने के लिए लाया गया था, अब तक अपने मूल उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। बजट 2026 सरकार के पास इन नियमों को दोबारा प्रभावी बनाने का अहम अवसर हो सकता है।
सेफ हार्बर नियमों का मकसद बहुराष्ट्रीय कंपनियों और करदाताओं को यह भरोसा देना था कि तय मानकों का पालन करने पर टैक्स विवाद नहीं होगा। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कड़े मार्जिन, सीमित सेक्टर कवरेज और जटिल शर्तों के कारण कंपनियों ने इन नियमों को अपनाने से परहेज किया।
बजट 2026 में सरकार सबसे पहले सेफ हार्बर मार्जिन को व्यावहारिक स्तर पर लाने पर विचार कर सकती है। मौजूदा दरें कई उद्योगों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं। इसके अलावा, डिजिटल सर्विसेज, स्टार्टअप्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को भी सेफ हार्बर के दायरे में लाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बजट में सेफ हार्बर नियमों को Advance Pricing Agreement (APA) ढांचे के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है, जिससे करदाताओं को अधिक स्पष्टता और भरोसा मिले।
एक और अहम सुधार हो सकता है सरल अनुपालन प्रक्रिया और लंबी वैधता अवधि। इससे कंपनियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा और भारत की टैक्स प्रणाली निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगी।
यदि बजट 2026 में ये सुधार किए जाते हैं, तो सेफ हार्बर नियम वास्तव में टैक्स विवाद कम करने, निवेश बढ़ाने और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।