The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

क्या असफल लिव-इन रिलेशनशिप से रेप का आरोप लगाया जा सकता है? इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख

Crime  •  👁 12 views  •  26 Jan 2026
क्या असफल लिव-इन रिलेशनशिप से रेप का आरोप लगाया जा सकता है? इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख
हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि असफल लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर किसी पर स्वतः रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी यौन संबंध में सहमति होना और कानूनी प्रावधानों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मामले में एक महिला ने अपने साथी के खिलाफ रेप का आरोप लगाया था, जबकि आरोपी ने कहा कि यह एक स्वेच्छा से शुरू किया गया लिव-इन रिलेशनशिप था। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि यदि किसी रिश्ते में यौन संबंध की सहमति पहले से मौजूद थी, तो रिश्ते के असफल होने या टूटने के बाद स्वतः रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कानूनी प्रक्रिया और सबूत किसी भी यौन अपराध के आरोप के निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। केवल व्यक्तिगत संबंध या विवाद के आधार पर गंभीर अपराध का आरोप नहीं लगाया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला समानता और न्याय की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यौन अपराध के मामलों में सतर्कता और प्रमाणिकता की जरूरत को उजागर करता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह उदाहरण देकर बताया कि कानून सहमति और साक्ष्यों पर आधारित है, न कि केवल रिश्तों की असफलता या निजी झगड़े पर। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि लिव-इन पार्टनर होने के नाते दोनों पक्षों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना चाहिए।
इस निर्णय से स्पष्ट है कि कानून किसी भी व्यक्तिगत रिश्ते के टूटने को अपराध नहीं मानता, और हर आरोप का मूल्यांकन तथ्य और सहमति के आधार पर ही होगा।