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EU कार्बन टैक्स की चुनौती: नियमों के अनुरूप ढलने के लिए भारतीय उद्योग तलाश रहा है नए रास्ते

National  •  👁 11 views  •  26 Jan 2026
EU कार्बन टैक्स की चुनौती: नियमों के अनुरूप ढलने के लिए भारतीय उद्योग तलाश रहा है नए रास्ते
यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM) जैसे कड़े पर्यावरणीय नियम भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव ने कहा है कि भारतीय इंडस्ट्री EU के कार्बन टैक्स नियमों के हिसाब से चलने के लिए अलग-अलग रास्ते तलाश रही है।
उनके अनुसार, स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर अपनी-अपनी प्रकृति और कार्बन उत्सर्जन प्रोफाइल के आधार पर रणनीतियां विकसित कर रहे हैं। कुछ उद्योग नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, तो कुछ ऊर्जा दक्षता, ग्रीन हाइड्रोजन और लो-कार्बन टेक्नोलॉजी को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
सचिव ने कहा कि EU का कार्बन टैक्स केवल व्यापारिक बाधा नहीं है, बल्कि यह भारतीय उद्योग के लिए अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने का अवसर भी है। लंबे समय में इससे भारत के जलवायु लक्ष्यों और नेट-ज़ीरो प्रतिबद्धताओं को मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार उद्योगों के साथ लगातार संवाद में है और उन्हें तकनीकी, नीतिगत और वित्तीय सहयोग देने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है। खासतौर पर निर्यात-आधारित उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढलने में मदद करने पर फोकस किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि EU कार्बन टैक्स से बचने के लिए भारतीय कंपनियों को अपने कार्बन फुटप्रिंट की पारदर्शी रिपोर्टिंग, सप्लाई चेन सुधार और हरित ऊर्जा निवेश पर तेजी लानी होगी। हालांकि, यह बदलाव आसान नहीं होगा, लेकिन समय रहते कदम उठाने से भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।
EU के नियमों के मद्देनज़र यह स्पष्ट है कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल लागत पर नहीं, बल्कि टिकाऊ उत्पादन पर आधारित होगी।