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क्या वे इतने बड़े हैं कि उछल नहीं सकते? नई रिसर्च से पता चला है कि प्रागैतिहासिक कंगारू कैसे चलते थे

National  •  👁 20 views  •  24 Jan 2026
क्या वे इतने बड़े हैं कि उछल नहीं सकते? नई रिसर्च से पता चला है कि प्रागैतिहासिक कंगारू कैसे चलते थे
यह नई रिसर्च बताती है कि प्रागैतिहासिक विशाल कंगारू — जो आज के कंगारुओं से कई गुना भारी थे — इतने बड़े होकर भी पूरी तरह उछल (hop) नहीं पाने वाले नहीं थे, बल्कि कम दूरी के लिए उछल सकते थे, इससे पहले की धारणा को चुनौती मिलती है।
वैज्ञानिकों ने 94 आधुनिक कंगारू और 40 जीवाश्म (फॉसिल) नमूनों का विश्लेषण किया, जिनमें प्रागैतिहासिक “विशाल कंगारू” शामिल थे जिनका वजन लगभग 250 किलोग्राम तक हो सकता था — आज के सबसे बड़े कंगारू से लगभग दोगुना। इस शोध का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या इतने भारी जीव कूदने की आंतरिक कंकाल संरचना के कारण उछलने में सक्षम थे या नहीं।
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने तलव के हड्डी (metatarsal) और एड़ी की हड्डी (heel bone) की ताकत और आकार का परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि ये हड्डियाँ काफी मजबूत थीं और मज़बूत टेंडन (tendon) को सहारा देने के लिए पर्याप्त जगह थीं—जिससे यह संकेत मिलता है कि ये विशाल कंगारू लंबी दूरी के बजाय छोटे-छोटे उछालों में सक्षम हो सकते थे।
लेकिन शोध के अनुसार, ये प्रागैतिहासिक कंगारू वैसे उछलते नहीं थे जैसा आज के रेड कंगारू करते हैं। उनके टेंडन और हड्डी की बनावट से पता चलता है कि लंबे समय तक उछलना उनके लिए ऊर्जा-संचयी नहीं था, इसलिए वे शायद थोड़े-थोड़े उछाल, चलना, या यहां तक कि चार पैरों पर चलना जैसी विभिन्न गति विधियों का भी उपयोग करते थे।
संक्षेप में, यह रिसर्च पुराने अनुमान—कि विशाल कंगारू इतनी भारी वस्तु होने की वजह से उछल नहीं सकते थे—को संशोधित कर देती है। अब लगता है कि वे पूरी तरह उछलने से अनभिज्ञ नहीं थे, बल्कि संभवतः छोटे-छोटे उछालों तथा अन्य चलने के तरीकों को मिला कर अपने समय के पर्यावरणीय दबावों के अनुसार अनुकूलित थे।
यह खोज न सिर्फ कंगारू की प्रागैतिहासिक जीवविज्ञान को समझने में मदद करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि विशाल आकार ने उन्हें उछलने से पूरी तरह वंचित नहीं किया — उनके चलने का तरीका सीधे-सीधे आज के कंगारू जैसा नहीं, बल्कि एक मिलाजुला एल्गोरिथम था।