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‘देर से मिला न्याय, न्याय नहीं’: CJI सूर्यकांत बोले— अंतरिम राहत ही आम नागरिक के लिए असली न्याय तक पहुंच

National  •  👁 15 views  •  24 Jan 2026
‘देर से मिला न्याय, न्याय नहीं’: CJI सूर्यकांत बोले— अंतरिम राहत ही आम नागरिक के लिए असली न्याय तक पहुंच
नई दिल्ली – भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था में देरी और अंतरिम राहत के महत्व पर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि “देर से मिला न्याय, वास्तव में न्याय नहीं होता” और कई मामलों में अंतरिम राहत की शक्ति ही आम नागरिक के लिए न्याय तक पहुंच का एकमात्र वास्तविक साधन बन जाती है।
सीजेआई सूर्यकांत ने यह टिप्पणी एक न्यायिक कार्यक्रम के दौरान की, जहां उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों और आम लोगों पर उनके प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब किसी नागरिक को अंतिम फैसला आने में वर्षों लग जाते हैं, तब अंतरिम आदेश ही उसे तत्काल राहत और संरक्षण प्रदान करते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत को केवल अस्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का एक अहम औजार है। खासकर गरीब, कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए अदालत से मिलने वाली त्वरित राहत उनके जीवन, आजीविका और सम्मान की रक्षा करती है।
सीजेआई ने यह भी कहा कि न्यायपालिका को इस शक्ति का प्रयोग संवेदनशीलता, संतुलन और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए, ताकि किसी पक्ष के अधिकारों का दुरुपयोग न हो। साथ ही, उन्होंने निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों तक मामलों के शीघ्र निपटारे की आवश्यकता पर जोर दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी भारतीय न्याय प्रणाली की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। लंबित मामलों की संख्या बढ़ने के बीच अंतरिम राहत नागरिकों के लिए तात्कालिक न्याय का माध्यम बनती जा रही है।
सीजेआई सूर्यकांत का यह बयान न्याय सुधारों और अदालतों की कार्यप्रणाली पर एक महत्वपूर्ण विमर्श को आगे बढ़ाता है, जिसमें न्याय की गति और पहुंच को समान रूप से आवश्यक बताया गया है।