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भारत का गुलाबी रहस्य: गंगा ही वह अनोखी नदी क्यों है जहाँ ‘लंबे समय से खोए’ अमेज़न की समकक्ष मिलती है

National  •  👁 12 views  •  24 Jan 2026
 भारत का गुलाबी रहस्य: गंगा ही वह अनोखी नदी क्यों है जहाँ ‘लंबे समय से खोए’ अमेज़न की समकक्ष मिलती है
भारत की पवित्र नदी गंगा में एक ऐसा जैविक रहस्य छुपा है, जिसे जानना न सिर्फ आकर्षक है बल्कि संरक्षण के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। गंगा और इसके सहायक नदियों में रहते हैं गंगेटिक नदी डॉल्फ़िन — जो कि दुनिया की सबसे अनोखी नदी डॉल्फ़िन प्रजातियों में से एक मानी जाती है और वैज्ञानिकों के अनुसार यह अमेज़न नदी के ‘लंबे समय से खोए’ समकक्ष जीवों से बहुत मिलता‑जुलता है।
गंगेटिक नदी डॉल्फ़िन, जिसे भारत का राष्ट्रीय जलीय पशु भी घोषित किया गया है, मुख्य रूप से गंगा‑ब्रह्मपुत्र‑मेघना नदी तंत्र और उसके मुख्य सहायक नदियों में पाए जाते हैं। इन्हें देखने का अवसर दुनिया में केवल यहीं मिलता है क्योंकि ये अन्य दुनियाभर की नदी प्रणालियों से अलग विकास के परिणाम हैं और इनके अनोखे अनुकूलन ने इन्हें विशिष्ट बनाया है।
जहाँ अमेज़न नदी की जीव‑जन्तु विविधता गुलाबी रंग वाले ‘बोटो’ डॉल्फ़िन के लिए जानी जाती है, वहीं गंगा‑ब्रहमपुत्र में रहने वाले गंगेटिक डॉल्फ़िन का रंग अधिकतर ग्रे‑भूरा होता है, लेकिन वे भी कुछ परिस्थितियों में गुलाबी टोन ग्रहण कर सकते हैं। इनके शरीर की यह रंगत पानी की खनिज संरचना, भोजन और रक्त‑नलिकाओं की विशेषता के कारण बदलती है, जिससे वैज्ञानिकों को भी इनके विकास और परिवेशीय अनुकूलन के बारे में शोध करने का अवसर मिलता है।
हालांकि गंगेटिक डॉल्फ़िन अब भी ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) प्रजाति के तहत हैं, भारत में उनका संरक्षण ‘प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन’ जैसे अभियानों के जरिये किया जा रहा है, जिससे उनकी आबादी के बारे में डाटा एकत्रित किया जा रहा है और संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिल रही है।
गंगा का यह जैविक रहस्य न सिर्फ भारत की प्राकृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे नदी पारिस्थितिक तंत्र में जैव विविधता का संरक्षण भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। गंगा की अनूठी स्थितियों के कारण ही यहाँ विश्व‑स्तर की नदी डॉल्फ़िन जैसे जीवों को देखा जा सकता है, जो इंसानों के संरक्षण प्रयासों से ही अपनी मौजूदगी बनाए रख पाए हैं।