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भारत की गणतंत्र दिवस परेड: शुरुआती सालों से आज तक का विकास और भव्य रूप

National  •  👁 10 views  •  24 Jan 2026
भारत की गणतंत्र दिवस परेड: शुरुआती सालों से आज तक का विकास और भव्य रूप
भारत का गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता नई दिल्ली की राजपथ पर होने वाली भव्य परेड है, जो देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति का जीवंत प्रदर्शन करती है। परेड का इतिहास और विकास भारतीय लोकतंत्र की प्रगति के साथ गहराई से जुड़ा है।
पहली गणतंत्र दिवस परेड 26 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी। उस समय परेड अपेक्षाकृत सरल और छोटी थी, जिसमें मुख्य रूप से सैनिकों की टुकड़ियाँ और परंपरागत झांकियाँ शामिल थीं। सेना, नौसेना और वायु सेना की बुनियादी क्षमताओं का प्रदर्शन सीमित था। मुख्य उद्देश्य देशवासियों में राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना जगाना था।
समय के साथ, परेड का स्वरूप और भव्यता बढ़ती गई। 1960 और 1970 के दशक में राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा प्रस्तुत झांकियाँ शामिल होने लगीं, जो भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक विविधता को दर्शाती थीं। साथ ही, आधुनिक हथियार प्रणालियों और सैन्य तकनीक का प्रदर्शन भी शुरू हुआ, जिससे परेड रणनीतिक और तकनीकी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गई।
1990 के बाद से परेड में अंतरराष्ट्रीय मेहमान, एरोबैटिक्स प्रदर्शन, ट्रैक्टर-ट्रेलर झांकियाँ और रोबोटिक एवं हाई-टेक उपकरण शामिल होने लगे। यह परेड अब केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक नहीं रही, बल्कि वैज्ञानिक और सामाजिक प्रगति का भी जश्न बन गई।
आज, गणतंत्र दिवस परेड देश के लिए राष्ट्रीय गौरव, सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का एक अद्वितीय प्रतीक है। यह प्रत्येक भारतीय को याद दिलाती है कि लोकतंत्र केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और गर्व का एहसास भी है।