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समझाया गया: गुरुग्राम मेट्रो के लिए हरियाणा की डायरेक्ट लैंड परचेज पॉलिसी — यह ज़मीन मालिकों को कैसे प्रभावित करती है

National  •  👁 11 views  •  22 Jan 2026
समझाया गया: गुरुग्राम मेट्रो के लिए हरियाणा की डायरेक्ट लैंड परचेज पॉलिसी — यह ज़मीन मालिकों को कैसे प्रभावित करती है
हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के ज़मीनी हिस्सों को जल्दी और प्रभावी ढंग से साफ़ करने के लिए “डायरेक्ट लैंड परचेज पॉलिसी (Direct Land Purchase Policy)” लागू कर दी है, जिसका उद्देश्य मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण में देरी को कम करना है। नई नीति से न केवल मेट्रो पथ को समयबद्ध रूप से पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि ज़मीन मालिकों के लिए भी स्पष्ट वित्तीय और कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं।
🧱 क्या है डायरेक्ट लैंड परचेज पॉलिसी?
इस नीति के तहत गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) सीधे निजी ज़मीन/संपत्ति को आपसी बातचीत (mutual negotiation) के ज़रिए खरीदेगी। इसका मतलब यह है कि ज़मीन मालिकों से सरकारी अधिग्रहण (acquisition) प्रक्रिया का इंतज़ार किए बिना सीधे सौदा किया जाएगा।
💰 ज़मीन मालिकों को क्या फायदा मिलेगा?
✔️ जो ज़मीन मालिक आपसी सहमति से जमीन बेचने को तैयार होंगे, उन्हें 2013 के RFCTLARR एक्ट के तहत मिलने वाले मुआवजे से लगभग 25% अधिक मुआवजा दिया जाएगा।
✔️ इसमें स्टाम्प ड्यूटी में छूट, पुनर्वास व पुनर्स्थापन लाभ, और सशर्त बोनस भी शामिल है। भुगतान सीधे बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के माध्यम से किया जाएगा।
⚠️ इनकार करने पर क्या होगा?
अगर कोई ज़मीन मालिक बातचीत में शामिल नहीं होता या जमीन बेचने से मना कर देता है, तो सरकार उसके खिलाफ अनिवार्य अधिग्रहण (compulsory acquisition) की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। ऐसी स्थिति में मालिकों के पास नेगोशिएटेड बोनस प्राप्त करने का विकल्प नहीं रहेगा और उन्हें केवल आधिकारिक अधिग्रहण के तहत तय मुआवजा मिलेगा।
📈 यह नीति क्यों जरूरी है?
गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में कुछ महत्वपूर्ण निजी ज़मीन हिस्सों का इस्तेमाल होना है — जैसे स्टेशन, मार्ग के समीप भूखंड और डिपो — जिन्हें समय पर खाली कराना ज़रूरी है। पारंपरिक अधिग्रहण प्रक्रिया लंबी और विवादास्पद हो सकती है, इसलिए आपसी बातचीत आधारित सीधी खरीद नीति अपनाई गयी है ताकि परियोजना को देर न हो।
📊 असर – ज़मीन मालिकों पर
➡️ सकारात्मक:
बेहतर मुआवजा, स्टाम्प ड्यूटी छूट और प्रत्यक्ष भुगतान मिलने की संभावना बढ़ी।
ज़मीन मालिकों को सौदे पर नियंत्रण और तेज़ भुगतान का विकल्प मिलता है।
➡️ नकारात्मक:
इनकार करने पर अनिवार्य अधिग्रहण का खतरा और कम बातचीत का अवसर।
कुछ मालिकों को बोनस लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।
👉 संक्षेप में: डायरेक्ट लैंड परचेज पॉलिसी से ज़मीन मालिकों को बेहतर मुआवजा और सुविधा मिल सकती है, लेकिन इनकार करने वालों के लिए अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। इससे गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के समयबद्ध पूरा होने की संभावना मजबूत होगी और ज़मीन मालिकों को भी पारदर्शी लाभ मिलेंगे।