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पंजाब के किसान सुरक्षा बाड़ को पाकिस्तान सीमा के पास क्यों ले जाना चाहते हैं? जानिए पूरा मामला

National  •  👁 34 views  •  22 Jan 2026
पंजाब के किसान सुरक्षा बाड़ को पाकिस्तान सीमा के पास क्यों ले जाना चाहते हैं? जानिए पूरा मामला
पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले किसान एक बार फिर सुरक्षा बाड़ (फेंसिंग) को लेकर अपनी मांगों के कारण सुर्खियों में हैं। किसानों की मांग है कि भारत–पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी सुरक्षा बाड़ को और आगे, यानी सीमा के बिल्कुल करीब ले जाया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से उन्हें खेती करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, पंजाब के कई सीमावर्ती जिलों—जैसे फिरोजपुर, अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर—में सुरक्षा कारणों से अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ दूरी पर सुरक्षा बाड़ लगाई गई है। इस बाड़ और वास्तविक सीमा के बीच की जमीन को “जीरो लाइन” या “नो मेंस लैंड” के पास की खेती योग्य जमीन माना जाता है। बड़ी संख्या में किसानों की जमीन इस बाड़ के उस पार चली गई है।

किसानों का कहना है कि उन्हें दिन में तय समय पर ही अपनी जमीन पर जाने की अनुमति मिलती है और शाम होते ही वापस लौटना पड़ता है। कई बार फसल की देखभाल, सिंचाई और कटाई के समय यह समय सीमा बड़ी समस्या बन जाती है। इसके अलावा, पहचान पत्र, तलाशी और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया भी खेती को कठिन और समय-consuming बना देती है।
पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले किसान एक बार फिर सुरक्षा बाड़ (फेंसिंग) को लेकर अपनी मांगों के कारण सुर्खियों में हैं। किसानों की मांग है कि भारत–पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी सुरक्षा बाड़ को और आगे, यानी सीमा के बिल्कुल करीब ले जाया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से उन्हें खेती करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, पंजाब के कई सीमावर्ती जिलों—जैसे फिरोजपुर, अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर—में सुरक्षा कारणों से अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ दूरी पर सुरक्षा बाड़ लगाई गई है। इस बाड़ और वास्तविक सीमा के बीच की जमीन को “जीरो लाइन” या “नो मेंस लैंड” के पास की खेती योग्य जमीन माना जाता है। बड़ी संख्या में किसानों की जमीन इस बाड़ के उस पार चली गई है।

किसानों का कहना है कि उन्हें दिन में तय समय पर ही अपनी जमीन पर जाने की अनुमति मिलती है और शाम होते ही वापस लौटना पड़ता है। कई बार फसल की देखभाल, सिंचाई और कटाई के समय यह समय सीमा बड़ी समस्या बन जाती है। इसके अलावा, पहचान पत्र, तलाशी और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया भी खेती को कठिन और समय-consuming बना देती है।