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धर्म परिवर्तन के बाद नाम बदलने का अधिकार: केरल हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

National  •  👁 25 views  •  13 Jan 2026
धर्म परिवर्तन के बाद नाम बदलने का अधिकार: केरल हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
केरल हाई कोर्ट ने एक अहम और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि धार्मिक परिवर्तन के बाद कोई महिला अपने मैरिज सर्टिफिकेट में नाम बदलवा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता, पहचान और निजता से जुड़ा हुआ है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।
यह मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा था, जिसने विवाह के बाद स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया था और उसी के अनुरूप अपने नाम में बदलाव चाहती थी। महिला ने संबंधित विवाह पंजीकरण कार्यालय से मैरिज सर्टिफिकेट में नाम संशोधन का अनुरोध किया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद महिला ने केरल हाई कोर्ट का रुख किया।
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और उसमें परिवर्तन करने की स्वतंत्रता देता है। जब कोई व्यक्ति कानूनी रूप से धर्म परिवर्तन करता है, तो उसकी पहचान से जुड़े दस्तावेज़ों में बदलाव करना उसका मौलिक अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा कि विवाह प्रमाणपत्र केवल एक प्रशासनिक रिकॉर्ड है, जिसे व्यक्ति की बदली हुई वैध पहचान के अनुरूप अपडेट किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे महिला के मैरिज सर्टिफिकेट में नया नाम दर्ज करें और इस प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएँ न डालें। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कानूनी पहचान व्यक्ति की गरिमा और आत्मनिर्णय से जुड़ी होती है, और राज्य का दायित्व है कि वह इसे सम्मान दे।
यह फैसला उन लोगों के लिए मिसाल माना जा रहा है, जो विवाह या अन्य कारणों से धर्म परिवर्तन के बाद अपने आधिकारिक दस्तावेज़ों में नाम बदलवाने में कठिनाइयों का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को मज़बूती देने वाला है।