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“डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई प्रक्रिया नहीं: बिहार पुलिस ने बढ़ते साइबर स्कैम को लेकर किया अलर्ट

Crime  •  👁 20 views  •  02 Jan 2026
“डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई प्रक्रिया नहीं: बिहार पुलिस ने बढ़ते साइबर स्कैम को लेकर किया अलर्ट
पटना/बिहार: बिहार पुलिस ने आम जनता को एक गंभीर साइबर ठगी से सावधान करते हुए “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम को लेकर आधिकारिक साइबर क्राइम अवेयरनेस पोस्टर जारी किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई व्यवस्था नहीं है और न ही पुलिस या किसी अन्य जांच एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल पर किसी की गिरफ्तारी की जाती है।

पुलिस के अनुसार, हाल के समय में साइबर ठग खुद को CBI, ED, पुलिस अधिकारी甚至 सुप्रीम कोर्ट के जज बताकर लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। ये ठग फोन या वीडियो कॉल करके दावा करते हैं कि पीड़ित का नाम किसी अवैध गतिविधि, जैसे प्रतिबंधित सामान वाले पार्सल या मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल है।

इसके बाद ठग पीड़ित को वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर करते हैं और डर, धमकी व मानसिक दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में ठग यह भी कहते हैं कि मामला “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़ा है और किसी को बताने से मना करते हैं, ताकि पीड़ित को अकेला किया जा सके।

बिहार पुलिस ने लोगों को इस स्कैम से बचने के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:

यदि कोई खुद को पुलिस या एजेंसी बताकर वीडियो कॉल पर डराए, तो तुरंत कॉल काट दें।

किसी भी जांच या वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे न भेजें, क्योंकि सरकारी एजेंसियां कभी UPI या बैंक ट्रांसफर से पैसे नहीं मांगतीं।

ठगों की बातों में आकर खुद को अलग न करें, तुरंत परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें।

संदेह होने पर सीधे अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करें।

शिकायत कहां करें?
यदि आप या आपका कोई परिचित इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो बिना देर किए:

राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

साइबर क्राइम पोर्टल पर जाकर शिकायत दर्ज करें।

बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, जागरूक रहें और किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की सूचना तुरंत पुलिस को दें।