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कार्यशाला से विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक कार्य करने का अनुभव भी प्राप्त करते हैं : अशोक कुमार (आईपीएस, सेवानिवृत्त) कुलपति

Sports   •   👁 32 views   •   20 Mar 2026
कार्यशाला से विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक  कार्य करने का अनुभव भी प्राप्त करते हैं : अशोक कुमार (आईपीएस, सेवानिवृत्त) कुलपति
( अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कार्यशाला का समापन, छात्रों में दिखा उत्साह कार्यशाला के माध्यम से विश्वविद्यालय ने खेल विज्ञान एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में विद्यार्थियों को आधुनिक, व्यावहारिक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया ।)


हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई, सोनीपत में आयोजित स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कार्यशाला का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यशाला दो चरणों में आयोजित की गई थी, जिसमें पहले चरण (4 फरवरी से 10 फरवरी) में पी.जी. डिप्लोमा स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जबकि दूसरे चरण में पी.जी. डिप्लोमा स्पोर्ट्स कोचिंग, बी.पी.ई.एस., एम.पी.ई.एस. तथा बी.एससी. स्पोर्ट्स साइंस के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान विभिन्न खेल विधाओं के अनुरूप गेम-स्पेसिफिक वार्म-अप, एनर्जी सिस्टम कंडीशनिंग, स्पीड ट्रेनिंग सहित कई व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जिससे विद्यार्थियों को खेल-विशिष्ट फिटनेस के वैज्ञानिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला। इस कार्यशाला के मुख्य विशेषज्ञ गौरव कौशिक, हेड स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग एक्सपर्ट, ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से संबद्ध) रहे। उन्होंने जर्मनी की लाइपजिग यूनिवर्सिटी से स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है तथा वे ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग एसोसिएशन लेवल-2 प्रोफेशनल, बी.सी.सी.आई. लेवल-2 प्रमाणित स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच और जर्मनी के लाइसेंस-बी फिटनेस कोच हैं। कार्यशाला में उन्होंने ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग एसोसिएशन लेवल-1 एवं लेवल-2 प्रमाणन मानकों के अनुरूप विषयवस्तु को शामिल कर विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की जानकारी और अनुभव प्रदान किया। समापन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक कुमार (आईपीएस, सेवानिवृत्त) ने गौरव कौशिक को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिससे विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक एवं वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव भी प्राप्त करते हैं और डिग्री प्राप्त करने के तुरंत बाद देश के विभिन्न खेल संस्थानों एवं अकादमियों में स्पोर्ट्स का स्तर बढ़ाने के लिए मार्केट-रेडी हो जाते हैं। कार्यशाला के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के पी.जी. डिप्लोमा (स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग) समन्वयक हर्षित वर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विशेषज्ञ का सहयोग किया। इस अवसर पर डीन फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स प्रो. योगेश चंदर, निदेशक खेल श्री संजय सारस्वत सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षण एवं कोचिंग संकाय सदस्यों ने कार्यशाला की सराहना की। विद्यार्थियों ने भी अपने फीडबैक में बताया कि यह कार्यशाला उनके लिए अत्यंत लाभकारी रही और इससे उनके ज्ञान एवं कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस कार्यशाला के माध्यम से विश्वविद्यालय ने खेल विज्ञान एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में विद्यार्थियों को आधुनिक, व्यावहारिक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।