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‘फैंटम वर्कर्स’ और जाली दस्तावेज़ों का जाल: हरियाणा में 1,500 करोड़ रुपये का कथित घोटाला कैसे हुआ

Crime  •  👁 12 views  •  02 Jan 2026
‘फैंटम वर्कर्स’ और जाली दस्तावेज़ों का जाल: हरियाणा में 1,500 करोड़ रुपये का कथित घोटाला कैसे हुआ
हरियाणा में सामने आया 1,500 करोड़ रुपये का कथित घोटाला सरकारी योजनाओं और श्रम कल्याण प्रणालियों में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में ‘फैंटम वर्कर्स’ यानी कागज़ों में मौजूद लेकिन वास्तविकता में गैर-मौजूद मजदूरों के नाम पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन निकाला गया।
🔹 क्या हैं ‘फैंटम वर्कर्स’
फैंटम वर्कर्स वे कर्मचारी होते हैं जिनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज होता है, लेकिन वे कभी काम पर मौजूद नहीं रहे। आरोप है कि ठेकेदारों और कुछ अधिकारियों ने मिलकर:
जाली वर्क डॉक्यूमेंट्स तैयार किए
फर्जी आधार/पहचान विवरण जोड़े
हाजिरी और भुगतान रिकॉर्ड में हेरफेर किया
इन दस्तावेज़ों के आधार पर मजदूरी, सब्सिडी और अन्य भुगतान जारी कराए गए।

🔹 घोटाला कैसे फैला
जांच में संकेत मिले हैं कि यह गड़बड़ी:
निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी योजनाओं
श्रम-आधारित सरकारी प्रोजेक्ट्स
आउटसोर्सिंग और ठेका प्रणाली
में वर्षों तक चलती रही। कमजोर ऑडिट, डिजिटल सत्यापन की कमी और विभागीय निगरानी के अभाव ने इस नेटवर्क को फलने-फूलने दिया।

🔹 1,500 करोड़ रुपये का आंकड़ा कैसे बना
प्राथमिक आकलन के मुताबिक:
हजारों फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान
बार-बार एक ही पहचान से अलग-अलग साइट्स पर एंट्री
बैंक खातों और भुगतान चैनलों का दुरुपयोग
से कुल राशि करीब 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

🔹 सरकार और एजेंसियों की कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद:
विशेष जांच शुरू की गई
संदिग्ध दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जांच
जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
की जा रही है। सरकार ने भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए डिजिटल हाजिरी, आधार-आधारित सत्यापन और रियल-टाइम ऑडिट पर जोर देने की बात कही है।
🔹 निष्कर्ष
हरियाणा का यह कथित ‘फैंटम वर्कर्स’ घोटाला सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला देशभर में सरकारी परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग करेगा।