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₹4.21 करोड़ का बिजली बिल बरकरार: तेलंगाना हाई कोर्ट ने दशकों पुराने बकाया पर प्राइवेट फर्म की अपील खारिज की

Crime  •  👁 8 views  •  02 Jan 2026
₹4.21 करोड़ का बिजली बिल बरकरार: तेलंगाना हाई कोर्ट ने दशकों पुराने बकाया पर प्राइवेट फर्म की अपील खारिज की
तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में दशकों पुराने बिजली बकाया को लेकर दायर की गई एक प्राइवेट कंपनी की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि केवल समय बीत जाने के आधार पर बिजली बकाया को माफ नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद संबंधित फर्म को 4.21 करोड़ रुपये का बिजली बिल चुकाना होगा।

🔹 क्या है पूरा मामला
यह मामला एक निजी औद्योगिक इकाई से जुड़ा है, जिस पर राज्य की बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) का आरोप है कि उसने लंबे समय तक बिजली शुल्क का भुगतान नहीं किया। कंपनी ने दलील दी कि बकाया राशि दशकों पुरानी है और इतने वर्षों बाद इसकी वसूली अनुचित है। साथ ही यह भी कहा गया कि मांग नोटिस देर से जारी किया गया।
हालांकि, तेलंगाना हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
🔹 हाई कोर्ट का क्या कहना है
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि:
बिजली की खपत एक निरंतर सेवा है
बकाया राशि का भुगतान करना उपभोक्ता की जिम्मेदारी है
देरी या प्रशासनिक चूक के आधार पर वैध बकाया से बचा नहीं जा सकता
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्ड और मीटरिंग के आधार पर बकाया सही पाया जाता है, तो उसे वसूलना कानूनन उचित है।
🔹 क्यों है यह फैसला अहम
इस फैसले का असर:
अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं पर
राज्य की बिजली वितरण कंपनियों की वसूली प्रक्रिया पर
पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे DISCOMs को पुराने बकाया वसूलने में कानूनी मजबूती मिलेगी।
🔹 प्राइवेट सेक्टर के लिए संदेश
अदालत के इस फैसले से निजी कंपनियों को यह साफ संदेश मिला है कि:
बिजली बकाया को लंबे समय तक टालना जोखिम भरा है
समय रहते भुगतान और रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है
🔹 निष्कर्ष
₹4.21 करोड़ के बिजली बिल पर तेलंगाना हाई कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ एक प्राइवेट फर्म के लिए झटका है, बल्कि यह पूरे औद्योगिक सेक्टर के लिए एक मिसाल भी बन सकता है। पुराने बकाया को लेकर अब कानूनी राहत की उम्मीद करना आसान नहीं होगा।