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‘फ्री स्पीच केवल सत्ता वालों के लिए बर्दाश्त है’: LSE के डिप्टी प्रेसिडेंट और VC ने US कैंपस में कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी

Education   •   👁 22 views   •   04 Feb 2026
‘फ्री स्पीच केवल सत्ता वालों के लिए बर्दाश्त है’: LSE के डिप्टी प्रेसिडेंट और VC ने US कैंपस में कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) के डिप्टी प्रेसिडेंट और वाइस-चांसलर ने अमेरिकी कैंपस में हाल ही में हुई विवादित कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “फ्री स्पीच को केवल तब बर्दाश्त किया जाता है जब यह सत्ता में बैठे लोगों के फायदे के लिए हो।” उन्होंने यह टिप्पणी वैश्विक स्तर पर स्वतंत्र अभिव्यक्ति और अकादमिक स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए की।
यूएस में एक विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ उठाए गए कदम ने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है। LSE के नेतृत्व ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल सत्ता-संबंधित या राजनीतिक रूप से सही दृष्टिकोण को ही सुरक्षित रखना, शिक्षा और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विश्वविद्यालयों को विविध विचारों और बहस के मंच के रूप में काम करना चाहिए, न कि केवल चयनित विचारधारा का संरक्षण करने वाली जगह के रूप में।
डिप्टी प्रेसिडेंट और VC ने कहा कि इस तरह की घटनाओं का असर सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता। “विश्व के विश्वविद्यालयों और अकादमिक समुदायों में इसका संकेत जाता है कि स्वतंत्र विचारों और आलोचनात्मक बहस को दबाया जा सकता है,” उन्होंने बताया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और अन्य देशों में कैंपस में हुई यह घटनाएँ एक व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती हैं, जहां सत्ता-संबंधित विचारों को बढ़ावा देने के लिए फ्री स्पीच सीमित की जा रही है।
LSE नेतृत्व का यह बयान न केवल अमेरिकी छात्रों और अकादमिक समुदाय के लिए चेतावनी है, बल्कि दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र विचार और बहस के संरक्षण की जरूरत पर भी ध्यान आकर्षित करता है।