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AI डेटा सेंटर बूम का साइड इफेक्ट: कैसे चुपचाप ऑटो सेक्टर के मार्जिन पर पड़ रहा है असर

Crime  •  👁 8 views  •  03 Feb 2026
AI डेटा सेंटर बूम का साइड इफेक्ट: कैसे चुपचाप ऑटो सेक्टर के मार्जिन पर पड़ रहा है असर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग के तेज़ी से बढ़ते इस्तेमाल ने दुनिया भर में डेटा सेंटर्स की मांग को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा दिया है। हालांकि यह बूम टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, लेकिन इसका एक कम चर्चित असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI डेटा सेंटर बूम चुपचाप ऑटो सेक्टर के मुनाफे यानी मार्जिन को कम कर रहा है।
दरअसल, बड़े AI डेटा सेंटर्स को भारी मात्रा में बिजली, सेमीकंडक्टर्स, कूलिंग सिस्टम और औद्योगिक धातुओं की जरूरत होती है। इन संसाधनों की बढ़ती मांग के कारण उनकी कीमतों में इज़ाफा हुआ है। ऑटोमोबाइल कंपनियां भी इन्हीं चिप्स, कॉपर, एल्यूमिनियम और ऊर्जा संसाधनों पर निर्भर करती हैं। नतीजतन, इनपुट कॉस्ट बढ़ने से वाहन निर्माताओं की लागत में इजाफा हो रहा है।
इसके अलावा, सेमीकंडक्टर निर्माता अब ज्यादा मुनाफे वाले AI और डेटा सेंटर से जुड़े ऑर्डर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे ऑटो सेक्टर को चिप्स की सप्लाई महंगी और सीमित होती जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इनमें हाई-परफॉर्मेंस चिप्स और बैटरी मैटेरियल की जरूरत ज्यादा होती है।
ऊर्जा खपत भी एक अहम पहलू बन गई है। डेटा सेंटर्स के लिए बढ़ती बिजली मांग से औद्योगिक टैरिफ बढ़ने का खतरा है, जिसका सीधा असर ऑटो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की लागत पर पड़ सकता है। कई देशों में ऑटो कंपनियां पहले ही बढ़ती लागत को ग्राहकों पर पूरी तरह डाल पाने में असमर्थ हैं, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन दबाव में आ गए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI डेटा सेंटर निवेश और तेज़ होगा। ऐसे में ऑटो सेक्टर को सप्लाई चेन में विविधता लाने, टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने और लागत नियंत्रण पर ज्यादा ध्यान देना होगा। यह साफ है कि AI क्रांति का फायदा जहां टेक सेक्टर को मिल रहा है, वहीं ऑटो उद्योग को इसके अप्रत्यक्ष दबावों से जूझना पड़ रहा है।