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‘अभूतपूर्व गिरावट’: हिमंत बिस्वा सरमा की ‘मिया’ टिप्पणी से असम में विपक्ष का गुस्सा भड़क गया

National  •  👁 9 views  •  30 Jan 2026
‘अभूतपूर्व गिरावट’: हिमंत बिस्वा सरमा की ‘मिया’ टिप्पणी से असम में विपक्ष का गुस्सा भड़क गया
गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की हाल ही में की गई ‘मिया’ टिप्पणी ने राजनीति में एक नया विवाद पैदा कर दिया है। यह बयान तब सामने आया जब सरमा ने बंग्लादेशी मूल के “मिया मुस्लिम” समुदाय से जुड़ी जनसंख्या और असम की पहचान के मुद्दे पर अपनी बात रखी—जिसे विपक्षी दलों ने संवेदनशील, विभाजनकारी और असम की सामाजिक एकता के लिए खतरा बताया है।
सरमा ने अपने बयान में कहा कि “मिया” शब्द का उपयोग उन्होंने उसी संदर्भ में किया, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में बांग्लादेशी अवैध प्रवास के प्रभाव का जिक्र करते हुए किया था। उन्होंने तर्क दिया कि इस शब्द का प्रयोग समुदाय ने स्वयं शुरू किया था और यह किसी समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने का उद्देश्य नहीं रखता। उनका कहना है कि उनका फोकस असम की जनसांख्यिकीय संतुलन और पहचान को सुरक्षित रखना है, न कि किसी धर्म के खिलाफ बयान देना।
हालांकि, विपक्षी दल इस बयान को साम्प्रदायिक रूप से विभाजनकारी मान रहे हैं। असम में कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सरमा की टिप्पणी से समुदायों के बीच नफरत और अविश्वास बढ़ सकता है और यह राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक भावनाओं का दोहन है। कुछ विपक्षी नेताओं ने इस बयान के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है।
समाचार एजेंसियों के अनुसार, यह टकराव खासकर उस समय उभरा है जब असम में विशेष मतदाता सूची संशोधन (Special Intensive Revision) चल रहा है और “मिया” समुदाय के लगभग पांच लाख नाम हटाने की प्रक्रिया जारी है—जिसे भी राजनीतिक दल विवादास्पद मुद्दा बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरमा की टिप्पणी और उसके बाद विपक्ष की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि असम की राजनीति अब पहचान, अवैध प्रवास और जनसंख्या संरचना जैसे गहन मुद्दों से जुड़ी हुई है। इस मुद्दे ने राज्य में सामाजिक और राजनीतिक बहस को और उभार दिया है, जिससे आगामी चुनावों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।