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हाई कोर्ट ने 19 साल लंबी लड़ाई में टीचर को दिलाया हार्ट सर्जरी का पूरा क्लेम, कहा — ‘सरकार को उदार होना चाहिए’

Crime  •  👁 6 views  •  30 Jan 2026
हाई कोर्ट ने 19 साल लंबी लड़ाई में टीचर को दिलाया हार्ट सर्जरी का पूरा क्लेम, कहा — ‘सरकार को उदार होना चाहिए’
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 19 साल पुरानी लड़ाई को आखिरकार समाप्त कर दिया है और एक सरकारी स्कूल शिक्षक के हार्ट सर्जरी के पूरे मेडिकल खर्च के क्लेम को मान्यता दी है। इस फैसले के साथ ही वर्षों से चली विवादास्पद मेडिकल रिइम्बर्समेंट याचिका को न्याय मिला।
यह मामला 2002 में हुआ एक इमरजेंसी हार्ट सर्जरी से जुड़ा है। भूपिंदर सिंह, जो उस समय पंजाब के मंसा जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूल में शिक्षक थे, को गंभीर हृदय समस्या के कारण अगस्त इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली में कोरोनरी बायपास सर्जरी करानी पड़ी थी। उस उपचार पर कुल लगभग ₹2,20,677 और ₹11,000 का खर्च आया था। सरकारी अधिकारी द्वारा उन्हें उन खर्चों की पूरी प्रतिपूर्ति नहीं दी गई, क्योंकि राज्य ने खर्च को नियंत्रित दरों तक सीमित रखना चाहा था।
कोर्ट ने यह तय किया कि जब सरकार के निर्देश पर जीवन रक्षक इलाज के लिए किसी मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया हो, तो खर्च को AIIMS दरों तक सीमित नहीं किया जा सकता और पूरा क्लेम दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सरकारी संदर्भ में तुरन्त निर्णय लिया गया होता तो यह मामला इतनी लंबी अवधि तक नहीं खिंचता। उन्होंने कहा, “यह मामला तुरंत तय हो जाना चाहिए था क्योंकि प्रतिपूर्ति का सवाल है।”
अदालत ने सरकार से यह भी कहा कि वह चिकित्सा प्रतिपूर्ति नीतियों को अधिक उदार और संवेदनशील बनाए, खासकर ऐसे मामलों में जहां व्यक्ति दर्द और जीवन खतरे में होता है और उसके पास अस्पताल चुनने की स्वतंत्रता नहीं होती। न्यायालय ने यह जिक्र करते हुए कहा कि एक मरीज सामान्यतः करोड़ों दरों या नियमों को देखकर अस्पताल नहीं चुनता, बल्कि नजदीकी और आपातकालीन इलाज उपलब्ध कराने वाले अस्पताल का चयन करता है।
इस निर्णय से सरकारी कर्मचारियों को हार्ट और अन्य गंभीर बीमारियों में उचित प्रतिपूर्ति मिलने के रास्ते में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम हुई है। अदालत ने सरकार से कहा कि नीतियों में उदारता बरतने से न केवल न्याय मिलेगा, बल्कि आम आदमी को जीवन‑रक्षक चिकित्सा सेवा का भरोसा भी मजबूत होगा।