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केरल हाई कोर्ट ने त्रिशूर के कविलक्कड़ श्री दुर्गादेवी मंदिर में आज रात 9 बजे आतिशबाजी की अनुमति दी

Crime  •  👁 7 views  •  30 Jan 2026
केरल हाई कोर्ट ने त्रिशूर के कविलक्कड़ श्री दुर्गादेवी मंदिर में आज रात 9 बजे आतिशबाजी की अनुमति दी
केरल हाई कोर्ट ने त्रिशूर जिले के कविलक्कड़ स्थित श्री दुर्गादेवी मंदिर में आज रात लगभग 9 बजे आतिशबाजी (fireworks) कार्यक्रम आयोजित करने का मार्ग साफ कर दिया है। कोर्ट ने जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज करते हुए मंदिर के पक्ष में निर्णय दिया और कहा कि आतिशबाजी कार्यक्रम को सुरक्षित रूप से आयोजित किया जा सकता है। यह निर्णय उस याचिका पर आया जिसमें मंदिर के आयोजकों ने जिला प्रशासन के प्रतिबंध के खिलाफ न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था।
मुख्य न्यायाधीश C. जयचंद्रन की अदालत ने स्थानीय अधिकारियों के खतरों और सुरक्षा चिंताओं के बावजूद आग्नेय शो (fireworks display) के पक्ष में आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आतिशबाजी तभी अनुमति होगी जब अग्नि और सुरक्षा विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस के मार्गदर्शन और सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए। विशेष तौर पर, कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि
✔ धमा (fireworks) के आस-पास ‘पोर्टेबल’ magazine लाइसेंस प्रयोग में लाया जाए,
✔ फायर ब्रिगेड और सुरक्षा कर्मी तैनात हों,
✔ प्रेक्षक क्षेत्र में पर्याप्त दूरी और बैरिकेडिंग सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट का यह आदेश मंदिर आयोजकों द्वारा प्रस्तुत आपदा प्रबंधन योजना और बीमा कवर को ध्यान में रखकर आया है, जिनमें आतिशबाजी को सुरक्षित ढंग से संचालित करने का विस्तृत विवरण था। जिला अधिकारी पहले आपत्ति जता रहे थे कि एक्सप्लोसिव मैगज़ीन की दूरी मानक आवश्यकताओं से कम है और पास में स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र मौजूद हैं, पर हाई कोर्ट ने इन चिंताओं के समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
यह फैसला धार्मिक आयोजनों और पूजा समारोहों में आतिशबाजी को लेकर लंबे समय से चली आ रही न्यायिक दिशा-निर्देशों के बीच आया है। पिछले निर्णयों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी समुदायों की धार्मिक भावना, सुरक्षा मानकों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के संतुलन पर ध्यान दिया है।
अंततः यह निर्णय मंदिर-समिति और श्रद्धालुओं के उत्साह को बढ़ावा देगा, खासकर त्योहारों और विशेष पूजा के अवसरों पर, परंतु इसके साथ ही सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना हर हाल में आवश्यक है।