The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

लालच और वासना रिश्तों को भी तोड़ देती है: झारखंड हाई कोर्ट ने संपत्ति विवाद में विधवा का केस रद्द करने से इनकार किया

Crime  •  👁 13 views  •  29 Jan 2026
लालच और वासना रिश्तों को भी तोड़ देती है: झारखंड हाई कोर्ट ने संपत्ति विवाद में विधवा का केस रद्द करने से इनकार किया
झारखंड हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि “लालच और वासना भाई‑बहनों को भी अलग कर देती है”, और इसी कारण न्यायालय ने संपत्ति के विवाद से जुड़ा एक आपराधिक मुकदमा रद्द करने से इनकार कर दिया है। 
मामला एक विधवा महिला की ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उसने अपने देवर, ननंद एवं अन्य रिश्तेदारों पर उसके पति की संपत्ति पर जबरन कब्ज़ा करने, घर में अनधिकृत प्रवेश करने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया था। महिला का दावा था कि उसके ससुराल वालों ने संपत्ति को अपने कब्जे में लेने के लिए उसके घर में गैर‑कानूनी तरीके से प्रवेश किया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। 
इस मामले में आरोपियों ने हाई कोर्ट से प्राथमिकी तथा निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि मामले में पर्याप्त सबूत नहीं हैं और मामला अनुचित तरीके से दर्ज किया गया है। हालांकि उच्च न्यायालय की जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की बेंच ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायतकर्ता महिला अदालत का दुरुपयोग कर रही है। इसलिए आपराधिक कार्रवाई जारी रह सकती है। 
न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी बताया कि संपत्ति और धन के लालच के कारण पारिवारिक रिश्तों में भी दरार आ सकती है, और इसलिए कानूनी प्रक्रिया को समाप्त नहीं किया जा सकता। इससे यह boodschap मिलता है कि संबंधित मामलों की गहराई से जांच के बिना मुकदमा रद्द नहीं किया जाना चाहिए। 
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका संपत्ति से जुड़े मामलों में गंभीरता से सबूत और तथ्यों की समीक्षा करती है और केवल याचिका‑आधारित अनुरोध के आधार पर मुकदमा रद्द नहीं होने देती, खासकर जब शिकायत करने वाली पक्ष कमजोर‑हालत विधवा जैसी संवेदनशील स्थिति में हो। 
 यह फैसला कानून के प्रति उच्च न्यायालय की सख्त निगरानी को दर्शाता है और सामजिक रिश्तों के भीतर संपत्ति विवादों के निपटारे में न्यायपालिका की निष्पक्ष भूमिका को महत्व देता है।