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पटना हाईकोर्ट का फैसला: बिहार में जमीन के मालिकाना हक का अंतिम अधिकार केवल सिविल कोर्ट के पास

Crime  •  👁 15 views  •  29 Jan 2026
पटना हाईकोर्ट का फैसला: बिहार में जमीन के मालिकाना हक का अंतिम अधिकार केवल सिविल कोर्ट के पास
पटना। बिहार में चल रहे भूमि सर्वेक्षण (Land Survey) के बीच पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि जमीन के मालिकाना हक (Ownership) का अंतिम निर्णय केवल सिविल कोर्ट (Civil Court) के पास ही होगा। यह फैसला भूमि विवादों को लेकर कानूनी स्पष्टता प्रदान करता है और भूमि सर्वेक्षण प्रक्रिया में किसी भी तरह की भ्रांति या गलत निर्णय की संभावना को कम करता है।
हाईकोर्ट के अनुसार, सरकारी सर्वेक्षण और संबंधित अधिकारी भूमि की स्थिति और रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं, लेकिन किसी भी विवादित जमीन के मालिकाना हक को निर्धारित करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। भूमि के स्वामित्व और विवादों का समाधान केवल सिविल न्यायालयों के माध्यम से ही किया जा सकता है। इस निर्णय से भूमि विवादों में संभावित द्वेष और आपसी मतभेदों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुलझाने की दिशा में स्पष्ट मार्गदर्शन मिला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय बिहार में भूमि सर्वेक्षण और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई भी गैर-कानूनी दखल या प्रशासनिक निर्णय नहीं लिया जा सकता। वहीं, भूमि मालिक और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए यह निर्णय मार्गदर्शन का काम करेगा।
सरकार और प्रशासन ने भी हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और कहा कि भूमि सर्वेक्षण के दौरान सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज़ केवल संदर्भ के लिए उपयोग किए जाएंगे, लेकिन अंतिम अधिकार न्यायालय के निर्णय का ही रहेगा।
कुल मिलाकर, पटना हाईकोर्ट का यह निर्णय भूमि सर्वेक्षण में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा करने और विवादों के निपटारे के लिए सिविल कोर्ट की सर्वोच्च भूमिका को स्पष्ट करता है। यह फैसला बिहार में भूमि विवादों की कानूनी प्रक्रिया को मजबूत और न्यायसंगत बनाने की दिशा में अहम कदम है।