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क्या ‘आखिरी नोट’ से बेल रद्द हो सकती है? पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक की आज़ादी क्यों बरकरार रखी

law  •  👁 14 views  •  28 Jan 2026
क्या ‘आखिरी नोट’ से बेल रद्द हो सकती है? पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक की आज़ादी क्यों बरकरार रखी
चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया कि किसी पीड़ित द्वारा छोड़ा गया ‘आखिरी नोट’ (suicide note या अंतिम बयान) अपने आप में किसी आरोपी की जमानत (बेल) रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने इस आधार पर एक अमेरिकी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की।
मामला एक आपराधिक केस से जुड़ा था, जिसमें पीड़ित के कथित आखिरी नोट में आरोपी का नाम लिया गया था। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि इस नोट के सामने आने के बाद आरोपी की बेल रद्द की जानी चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि बेल रद्द करना एक असाधारण कदम है और इसके लिए ठोस, प्रत्यक्ष और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होते हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति की आज़ादी को केवल भावनात्मक सामग्री या अप्रमाणित दस्तावेज़ के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। जजों ने यह भी रेखांकित किया कि बेल रद्द करने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया हो, जांच को प्रभावित किया हो या गवाहों को डराने की कोशिश की हो।
न्यायालय ने यह भी दोहराया कि अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता भारतीय संविधान का मूल सिद्धांत है, और इसे केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही सीमित किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला स्पष्ट करता है कि आपराधिक न्याय प्रणाली में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है—जहां पीड़ित के अधिकारों के साथ-साथ आरोपी के मौलिक अधिकारों की भी रक्षा की जाए।
यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम कानूनी मिसाल माना जा रहा है, जहां भावनात्मक सबूतों के आधार पर कठोर कार्रवाई की मांग की जाती है।