The Current Scenario
--:--:-- | Loading...
🔴 हिलसा में महाशिवरात्रि को लेकर ब्रह्माकुमारी बहनों की भव्य चैतन्य शोभायात्रा, नगर हुआ भक्तिमय     🔴 खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर खेत में दफनाया शव, ऊपर बो दी गेहूं की फसल; दो महीने बाद खुला राज     🔴 पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पहुँचे स्वामी विवेकानंद अवार्ड सेरेमनी में     🔴 बाँका में DM और SP ने किया EVM/VVPAT वेयर हाउस का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था की हुई गहन समीक्षा     🔴 लखीसराय पुलिस ने जारी किया पोस्टर, 14 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी लापता     🔴 मद्य निषेध के तहत बड़ी कार्रवाई, 69 लीटर अवैध शराब बरामद     🔴 दरभंगा में 6 साल की मासूम से दरिंदगी, इलाके में आक्रोश—आरोपी को कड़ी सजा की मांग     🔴 एकरससराय स्थित प्रसिद्ध आंगारी धाम की धर्मशाला जर्जर, हादसे का खतरा बढ़ा     🔴 अहमदाबाद के सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट स्कूल में लगातार घटनाएँ, अभिभावकों में गहरी चिंता     🔴 खुदागंज थाना पहुंचा भटकता मिला 8 वर्षीय बालक, स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस कर रही पहचान की कोशिश    
accident Airlines Animals Business Crime Economy Education Entertainment Environment Festival Health Inspection International law Local National Nature Politics Research social Social media Sports Technology walfare Weather

क्या बाइक पर दो सवार बैठाना लापरवाही है? केरल हाई कोर्ट ने कानून की स्थिति साफ की

law  •  👁 12 views  •  28 Jan 2026
क्या बाइक पर दो सवार बैठाना लापरवाही है? केरल हाई कोर्ट ने कानून की स्थिति साफ की
कोच्चि: मोटरसाइकिल पर पीछे दो लोगों को बैठाना क्या अपने आप में लापरवाही माना जाएगा? इस अहम सवाल पर केरल हाई कोर्ट ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि केवल दो सवार बैठाने के आधार पर किसी चालक को आपराधिक लापरवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि इससे दुर्घटना हुई या यातायात नियमों का उल्लंघन हुआ।
यह मामला एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि बाइक पर दो लोगों को पीछे बैठाने के कारण वाहन असंतुलित हुआ और हादसा हुआ। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत किसी कृत्य को लापरवाही मानने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि चालक ने जानबूझकर या स्पष्ट रूप से जोखिम भरा व्यवहार किया।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि कई मोटरसाइकिलें डिज़ाइन के अनुसार दो सवारों के लिए बनी होती हैं, और यदि वाहन क्षमता के भीतर है, चालक के पास वैध लाइसेंस है और सुरक्षा नियमों का पालन किया गया है, तो इसे अपने आप में लापरवाही नहीं कहा जा सकता।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बाइक पर क्षमता से अधिक लोग बैठाए जाएँ, हेलमेट न पहना जाए, या तेज़ रफ्तार जैसी परिस्थितियाँ हों, तो इसे लापरवाही और यातायात नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही की परिभाषा को अधिक स्पष्ट करता है। इससे यह भी संदेश जाता है कि हर दुर्घटना को केवल अनुमान के आधार पर आपराधिक मामले में नहीं बदला जा सकता।
केरल हाई कोर्ट का यह निर्णय ड्राइवर्स के अधिकार और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित करता है और भविष्य के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।