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‘कोई सीधा संबंध नहीं’: शादी रद्द होने के बाद मंगेतर की मौत के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने आरोपी को किया बरी

Crime  •  👁 13 views  •  28 Jan 2026
‘कोई सीधा संबंध नहीं’: शादी रद्द होने के बाद मंगेतर की मौत के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने आरोपी को किया बरी
बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में उस व्यक्ति को आपराधिक जिम्मेदारी से बरी कर दिया, जिस पर शादी रद्द होने के बाद उसकी मंगेतर की मौत से जुड़े आरोप लगाए गए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी टूटने और महिला की मौत के बीच कोई सीधा और कानूनी संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता।
मामले के अनुसार, महिला की सगाई आरोपी से तय हुई थी, लेकिन बाद में व्यक्तिगत कारणों से शादी रद्द कर दी गई। कुछ समय बाद महिला की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके परिवार ने आरोपी पर मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। पुलिस ने इसी आधार पर मामला दर्ज किया था।
हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि केवल रिश्ते का टूटना या भावनात्मक तनाव अपने आप में किसी व्यक्ति को आपराधिक रूप से दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी के किसी प्रत्यक्ष कृत्य या उकसावे के कारण ही महिला ने आत्मघाती कदम उठाया।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आत्महत्या के लिए उकसावे के मामलों में स्पष्ट, ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य की आवश्यकता होती है। अनुमान, भावनात्मक तर्क या सामाजिक दबाव के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आपराधिक कानून में कारण और परिणाम (cause and effect) के सिद्धांत को मजबूत करता है। अदालत ने यह संदेश दिया कि हर दुखद घटना के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं है, जब तक कि उसके खिलाफ स्पष्ट सबूत न हों।
यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है, जहां निजी रिश्तों के टूटने को आपराधिक दायित्व से जोड़ा जाता है।