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समावेशी शिक्षा की जीत: मद्रास हाई कोर्ट ने दिव्यांग लॉ स्टूडेंट के अधिकारों की रक्षा की

Education  •  👁 8 views  •  28 Jan 2026
समावेशी शिक्षा की जीत: मद्रास हाई कोर्ट ने दिव्यांग लॉ स्टूडेंट के अधिकारों की रक्षा की
चेन्नई: समावेशी शिक्षा और समान अवसरों के अधिकार को मजबूती देते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में दिव्यांग लॉ स्टूडेंट के पक्ष में दखल दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को दिव्यांग छात्रों को उनकी शारीरिक सीमाओं के आधार पर शिक्षा से वंचित करने का अधिकार नहीं है।
मामला एक ऐसे लॉ स्टूडेंट से जुड़ा था, जिसे उसकी दिव्यांगता के कारण क्लासरूम सुविधाओं, परीक्षा व्यवस्था और अकादमिक सपोर्ट में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। छात्र ने अदालत का रुख करते हुए कहा कि संस्थान द्वारा उचित सुविधाएं और सहायक उपाय उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे, जिससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 और संविधान का अनुच्छेद 21 शिक्षा के अधिकार को सम्मान और गरिमा के साथ जीने से जोड़ता है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि समावेशी शिक्षा केवल नीति नहीं, बल्कि कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने संबंधित संस्थान को निर्देश दिया कि वह उचित व्यवस्था, सहायक तकनीक और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराए, ताकि छात्र बिना किसी भेदभाव के अपनी पढ़ाई जारी रख सके। न्यायालय ने यह भी कहा कि सुविधाओं की कमी को बहाना बनाकर दिव्यांग छात्रों को पीछे नहीं रखा जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस फैसले को दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। यह निर्णय न केवल एक छात्र के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे देश में समावेशी शिक्षा के लिए एक मजबूत संदेश भी देता है।