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मद्रास हाई कोर्ट का अहम फैसला: दिव्यांग लॉ छात्र के समावेशी शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए किया हस्तक्षेप

Education  •  👁 15 views  •  28 Jan 2026
मद्रास हाई कोर्ट का अहम फैसला: दिव्यांग लॉ छात्र के समावेशी शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए किया हस्तक्षेप
मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए दिव्यांग (विकलांग) लॉ छात्र के समावेशी शिक्षा के अधिकार की रक्षा की है। यह फैसला न केवल एक छात्र के अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि भारत में समावेशी शिक्षा और समान अवसर की संवैधानिक भावना को भी मजबूत करता है।
मामला एक ऐसे लॉ स्टूडेंट से जुड़ा था, जिसने शारीरिक अक्षमता के कारण शैक्षणिक संस्थान से आवश्यक सुविधाएं और सहयोग न मिलने की शिकायत की थी। छात्र का कहना था कि संस्थान की लापरवाही के चलते वह अपनी पढ़ाई और परीक्षाओं में समान रूप से भाग नहीं ले पा रहा है।
हाई कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को शिक्षा से वंचित करना या उनके लिए अनुकूल व्यवस्था न करना संविधान और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि समावेशी शिक्षा कोई दया या सुविधा नहीं, बल्कि एक कानूनी और मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने संबंधित विश्वविद्यालय और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे छात्र को उचित सहायक साधन, सुलभ इंफ्रास्ट्रक्चर और अकादमिक सहयोग तुरंत उपलब्ध कराएं। साथ ही यह भी कहा गया कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे दिव्यांग छात्रों की जरूरतों को पहले से समझें और उसके अनुसार व्यवस्था करें।
शिक्षाविदों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह निर्णय उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि समावेशिता केवल नीति दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीन पर लागू होनी चाहिए।
संक्षेप में, मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला दिव्यांग छात्रों के लिए सम्मान, समानता और न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।