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केरल के बाद कर्नाटक ने भी सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को OPD सेवाओं तक सीमित किया

Health  •  👁 11 views  •  28 Jan 2026
केरल के बाद कर्नाटक ने भी सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को OPD सेवाओं तक सीमित किया
कर्नाटक सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को केवल आउट-पेशेंट (OPD) सेवाओं तक सीमित कर दिया है। यह कदम केरल सरकार के पहले से लागू मॉडल की तर्ज पर उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।
नए निर्देशों के अनुसार, सरकारी डॉक्टर अब निजी तौर पर इन-पेशेंट (IPD) सेवाएं, सर्जरी या भर्ती से जुड़ा इलाज नहीं कर सकेंगे। वे केवल परामर्श आधारित OPD सेवाएं ही निजी स्तर पर दे पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे डॉक्टरों की प्राथमिकता सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल पर केंद्रित रहेगी।
सरकार का कहना है कि कई मामलों में शिकायतें मिली थीं कि सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस के कारण अस्पताल में पूरा समय नहीं दे पा रहे थे, जिससे आम मरीजों को परेशानी हो रही थी। इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, डॉक्टरों के कुछ संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस पर सीमाएं लगाने से डॉक्टरों की आय पर असर पड़ेगा और इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में असंतोष पैदा हो सकता है। वहीं, मरीज संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस नीति को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया गया, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर सकती है। केरल मॉडल के अनुभव को देखते हुए कर्नाटक सरकार को इससे सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
संक्षेप में, कर्नाटक का यह फैसला सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम माना जा रहा है।