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कर्नाटक ने सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को आउट-पेशेंट सेवाओं तक सीमित किया

Health  •  👁 13 views  •  28 Jan 2026
कर्नाटक ने सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को आउट-पेशेंट सेवाओं तक सीमित किया
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने हाल ही में सरकारी डॉक्टरों द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस की सीमा तय करने वाला नया निर्णय लिया है। अब डॉक्टर केवल आउट-पेशेंट सेवाओं (OPD) तक ही प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकेंगे, जबकि इन-हॉस्पिटल या इमरजेंसी सेवाओं में उन्हें सरकारी अस्पताल में ही रहना अनिवार्य होगा।
इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार करना बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस पर नियंत्रण से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबित सूची और समय की समस्या कम हो सकती है।
कर्नाटक सरकार का यह निर्णय केरल के समान मॉडल पर आधारित है, जहां पहले ही डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को आउट-पेशेंट सेवाओं तक सीमित किया गया था। केरल में इस नीति के लागू होने के बाद सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता में सुधार और मरीजों की संतुष्टि बढ़ने की रिपोर्ट मिली है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती देने और सरकारी डॉक्टरों की पूर्णकालिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। साथ ही, इससे अवैध प्राइवेट प्रैक्टिस और संसाधनों का दुरुपयोग भी कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियम से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीजों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ सकती है। कर्नाटक सरकार ने कहा है कि नियम के पालन की सख्त निगरानी और समीक्षा प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
कर्नाटक का यह निर्णय स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और मरीज-केंद्रित नीतियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।