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कर्नाटक हाई कोर्ट ने निवारक हिरासत आदेश रद्द किया: दस्तावेज़ कन्नड़ में न होने का पाया गया उल्लंघन

law  •  👁 13 views  •  28 Jan 2026
कर्नाटक हाई कोर्ट ने निवारक हिरासत आदेश रद्द किया: दस्तावेज़ कन्नड़ में न होने का पाया गया उल्लंघन
कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें निवारक हिरासत (preventive detention) आदेश को रद्द कर दिया गया। अदालत ने यह आदेश इसलिए रद्द किया क्योंकि हिरासत में लिए गए बंदी को दिए गए सभी दस्तावेज़ कन्नड़ भाषा में उपलब्ध नहीं थे, जो राज्य की अधिकारिक भाषा है।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को निवारक हिरासत में लेने से पहले उसे अपने कानूनी अधिकारों और हिरासत संबंधी दस्तावेज़ों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। दस्तावेज़ की भाषा का पालन न करना बुनियादी मानवाधिकारों और संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है।
अधिवक्ता और मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला निवारक हिरासत मामलों में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बंदी को उनकी मातृभाषा में दस्तावेज़ उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी विकल्पों को समझ सकें।
यह फैसला राज्य के अन्य निवारक हिरासत मामलों के लिए भी प्रेसिडेंटियल और मार्गदर्शनकारी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में हिरासत आदेशों की वैधता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार हो सकता है।
कर्नाटक हाई कोर्ट के इस निर्णय ने यह संदेश दिया है कि भाषाई अधिकार और कानूनी पारदर्शिता किसी भी हिरासत या न्यायिक प्रक्रिया में अनिवार्य हैं। प्रशासन को इस बात का ध्यान रखना होगा कि सभी दस्तावेज़ आधिकारिक भाषा में उपलब्ध हों, अन्यथा अदालत किसी भी आदेश को रद्द कर सकती है।